शिक्षा विभाग में ग्रुप ए के अधिकारियों के फैसले लेंगे सीएम
सरकार ने तय किए अधिकारियों के अधिकार व जिम्मेदारी
चंडीगढ़, 24 अगस्त (हि.स.)। हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने विभागीय कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए नया स्थायी आदेश जारी किया है। सरकार ने विभाग में अधिकारों का नया खाका तैयार करते हुए यह तय कर दिया है कि किस स्तर का अधिकारी किस तरह के मामलों पर फैसला ले सकेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 अगस्त को नया स्थायी आदेश जारी किया है। इसके साथ पुराने सभी आदेश निरस्त कर दिए गए हैं।
साेमवार काे जारी हुए नए आदेश में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव, सचिव/विशेष सचिव और संयुक्त सचिव/अतिरिक्त सचिव स्तर तक मामलों का स्पष्ट बंटवारा किया गया है। व्यवस्था का मकसद यह है कि जिस स्तर पर फैसला लेने का अधिकार है, वहीं फाइल का निपटारा हो, ताकि हर मामले के लिए मंत्री या मुख्यमंत्री स्तर तक जाने की जरूरत न पड़े।
सीएम के पास बड़े और नीतिगत मामले
ग्रुप-ए अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, सजा और विदेश भेजने के अलावा बड़े नीतिगत फैसले, गंभीर वित्तीय अनियमितताएं तथा सरकारी स्कूल खोलने या बंद करने जैसे मामले मुख्यमंत्री के स्तर पर रहेंगे।
मंत्री के अधिकार भी तय
ग्रुप-बी, सी और डी कर्मचारियों की नियुक्ति व दंड, अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने, प्रशिक्षण के लिए भेजने, शिक्षा नियमों में बदलाव और एसीआर से जुड़ी अपील जैसे मामले शिक्षा मंत्री के स्तर पर तय होंगे।
अफसरों को भी फैसले का अधिकार
अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव स्तर पर अपील, परिवीक्षा बढ़ाने, छोटे दंड, विधानसभा समितियों को जवाब, सेवा विस्तार, ऑडिट आपत्तियों और जांच अधिकारियों की नियुक्ति जैसे मामले निपटाए जाएंगे। सचिव/विशेष सचिव को क्षेत्रीय अधिकारियों के खिलाफ दंड की अपील, छोटे कर्मचारियों की सजा, एक लाख रुपये तक की हानि माफ करने, मेडिकल बिल और पासपोर्ट के लिए एनओसी जैसे मामलों का अधिकार दिया गया है।
वहीं संयुक्त सचिव/अतिरिक्त सचिव छुट्टियों की मंजूरी, 25 हजार रुपये तक की हानि माफ करने, नाम या जन्मतिथि में बदलाव और निजी स्कूलों की शिकायतों पर फैसला कर सकेंगे।
अधिकारी बाहर तो नीचे वाला स्तर ले सकेगा फैसला
नए आदेश में ऐसी स्थिति के लिए भी व्यवस्था की गई है, जब मंत्री या कोई वरिष्ठ अधिकारी मुख्यालय से बाहर हो। जरूरी मामलों में उनके अधीनस्थ अधिकारी फैसला ले सकेंगे। हालांकि, बाद में संबंधित वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जानकारी देना जरूरी होगा। साथ ही केवल इस आधार पर किसी फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकेगी कि फाइल निर्धारित अधिकारी के बजाय किसी दूसरे सक्षम अधिकारी के पास चली गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

