हरियाणा में साइबर अपराध से निपटने के लिए बनेगा साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर

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-204 नए पदों के सृजन को मंजूरी

चंडीगढ़, 06 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और साइबर मामलों की जांच एवं निगरानी को मजबूत करने के लिए साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। राज्य सरकार ने सेंटर के लिए 204 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है।

स्वीकृत पदों में सात राजपत्रित अधिकारी, 161 पुलिसकर्मी, 12 मंत्रालयिक कर्मचारी और 15 ग्रुप-डी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों के लिए नौ संविदा आधारित आईटी पेशेवरों की नियुक्ति भी की जाएगी। नए पदों के सृजन से सेंटर की संस्थागत और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ साइबर अपराधों की रोकथाम, उभरते साइबर खतरों की निगरानी तथा जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी ) अजय सिंघल ने साइबर अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पीड़ितों को जल्द राहत उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

डीजीपी ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की शिकायतों पर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाए और ठगी गई राशि को जल्द से जल्द उनके खातों में वापस कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए पीड़ितों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

साइबर शिकायतों के प्रभावी अनुश्रवण के लिए हरियाणा पुलिस ने ऑनलाइन कंप्लेंट मॉनिटरिंग मॉड्यूल विकसित किया है। इसके माध्यम से पुलिस अधीक्षक (एसपी) अपने-अपने जिलों में लंबित शिकायतों की स्थिति की ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे।

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबे समय से लंबित शिकायतों के मामलों में संबंधित थाना प्रभारियों से देरी का कारण पूछा जाए और उनका निर्धारित समय में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शिकायतों के क्षेत्रवार विश्लेषण और उनके लंबित रहने के कारणों की पहचान पर भी जोर दिया।

पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था से शिकायतों की स्थिति पर बेहतर नजर रखने के साथ उन क्षेत्रों और कारणों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां साइबर अपराध संबंधी शिकायतों का निस्तारण अपेक्षाकृत अधिक समय ले रहा है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार और साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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