यमुनानगर:विराट हिंदू सम्मेलन में संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र सेवा का संदेश

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यमुनानगर:विराट हिंदू सम्मेलन में संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र सेवा का संदेश


यमुनानगर, 22 फ़रवरी (हि.स.)भारतीय संस्कृति के मूल्यों, सामाजिक समरसता और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से यमुनानगर के सेक्टर-17 के रेडक्रास मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने सहभागिता कर सांस्कृतिक चेतना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। सम्मेलन से पूर्व मातृशक्ति द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत कर दिया। इसके उपरांत वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन-यज्ञ आयोजित हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने राष्ट्र की उन्नति और समाज में सद्भाव की कामना करते हुए पूर्णाहुति दी।

मुख्य वक्ता संत संत गोपाल जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कारयुक्त जीवन ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल भावनात्मक विषय नहीं बल्कि दैनिक आचरण से जुड़ा कर्तव्य है। भारतीय जीवन पद्धति के 16 संस्कारों को अपनाने से परिवार और समाज दोनों में नैतिक मूल्यों का विकास संभव है। आध्यात्मिक वक्ता दीदी बीके अंजू ने सनातन परंपरा को मानवता के लिए शांति, संयम और सहअस्तित्व का मार्ग बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों को व्यवहार में उतारना समय की आवश्यकता है। उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल कुमार ने समाज को जोड़ने वाली समदृष्टि को हिंदू जीवन दर्शन का मूल बताते हुए सेवा और संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक यात्रा का उल्लेख किया।समाजसेवी अश्वनी सिंगला ने प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया, वहीं बिंदिया गर्ग द्वारा संयुक्त परिवार व्यवस्था को संस्कारों की पहली पाठशाला बताया गया। कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में विद्यार्थियों ने देशभक्ति प्रस्तुतियां दीं। चाहत खन्ना की कविता और जसमिन के भक्तिमय नृत्य ने उपस्थित लोगों की सराहना प्राप्त की। सम्मेलन का समापन राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सहयोग के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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