हिसार : शैक्षणिक संस्थानों के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक : प्रो. बिश्नोई

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हिसार : शैक्षणिक संस्थानों के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक : प्रो. बिश्नोई


‘निगोशिएशन, इन्फ्लुएंस एंड डिसीजन

मेकिंग फॉर वुमन लीडर’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

हिसार, 14 मई (हि.स.)।

गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण

केंद्र (एमएमटीटीसी) में ‘निगोशिएशन, इन्फ्लुएंस एंड डिसीजन मेकिंग फॉर वुमन लीडर’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में विभिन्न उच्च

शिक्षण संस्थानों की महिला प्रतिभागी अपने नेतृत्व, संवाद और निर्णय लेने की क्षमता

को मजबूत करने के लिए भाग ले रही हैं।

कुलपति प्रो. नरसी

राम बिश्नोई ने गुरुवार काे अपने संदेश में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के विकास में महिलाओं की

सक्रिय और निर्णायक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण

से महिला शिक्षक जटिल प्रशासनिक और अकादमिक परिस्थितियों में बेहतर संवाद कर सकेंगी

और प्रभावी निर्णय ले सकेंगी।

कार्यक्रम की निदेशिका

प्रो. सुनीता रानी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यशाला केवल भाषणों तक सीमित नहीं

होगी। इसमें प्रतिभागी आत्म-मूल्यांकन करेंगे, समूह चर्चा में भाग लेंगे, केस स्टडी

पर काम करेंगे, फिल्मों से सीखेंगे, अपने अनुभव साझा करेंगे और व्यवहारिक अभ्यास भी

करेंगे। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को केवल विषय समझाना नहीं, बल्कि उन्हें अपने अनुभवों

से सीखने और अपने संस्थानों में अधिक आत्मविश्वास के साथ संवाद, निर्णय और नेतृत्व

करने के लिए तैयार करना है।

समन्वयक डॉ. हरदेव

सिंह ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि तीन दिनों में महिला

प्रतिभागियों को संघर्ष को समझने, शक्ति और प्रभाव के सही उपयोग, वार्ता-कौशल, निर्णय

लेने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अकादमिक संस्थानों में अपनी भूमिका को मजबूत करने जैसे

विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उद्घाटन सत्र के

बाद आयोजित पैनल डिस्कशन में कैथल की उपायुक्त सुश्री अपराजिता, हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस

की प्रो. दीपा मंगला, और पंजाब विश्वविद्यालय के एमएमटीटीसी की निदेशिका प्रो. जयंती

दत्ता ने अपने अनुभव और विचार सांझा किए। इस कार्यशाला का

मुख्य उद्देश्य महिला शिक्षकों में ऐसी रणनीतिक सोच विकसित करना है, जिससे वे अपने

संस्थानों में अधिक आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व कर सकें और सकारात्मक बदलाव लाने में

प्रभावी भूमिका निभा सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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