हिसार : श्रम कल्याण बोर्ड में ‘घोटाला’ नहीं बल्कि मजदूरों को फंसाने की साजिश
हिसार, 02 जनवरी (हि.स.)। हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड में तथाकथित घोटाले की
आड़ में असल हमला प्रदेश के भवन निर्माण मजदूरों पर किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन
जानबूझकर मजदूरों को फर्जी बताकर बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं।
यह बात भवन निर्माण कामगार यूनियन तहसील कमेटी प्रधान लीलूराम जांगड़ा व तहसील
सचिव राकेश गंगवा ने संयुक्त बयान में कही। उन्होंने कहा कि निर्माण मजदूरों ने 14
दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री ओएसडी से बैठक हुई थी तथा
15 दिन में समाधान करने का आश्वासन दिया था लेकिन इसके विपरीत मजदूरों को फर्जी साबित
करने का काम किया जा रहा है। इन्हीं मजदूर-विरोधी नीतियों, 90 दिन की वर्क-स्लिप के
नाम पर मजदूरों को फंसाने और श्रम कल्याण बोर्ड की सुविधाएं रोकने के खिलाफ संयुक्त
निर्माण मजदूर मोर्चा, हरियाणा के आह्वान पर अब मजदूरों ने दो दिवसीय महापड़ाव की घोषणा
की है। प्रदेश में मंत्रियों के आवास पर लगाने का निर्णय लिया गया है। हिसार में निर्माण
के मजदूर मंत्री रणबीर गंगवा आवास पर दो दिवसीय पड़ाव डालेंगे।
यूनियन नेताओं ने शुक्रवार काे कहा कि वर्ष 2014 से 2018 के दौरान पूर्व श्रम मंत्री एवं
मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सैनी द्वारा जगह-जगह कैंप लगाकर लगभग 4 लाख मजदूरों का पंजीकरण
किया गया। राजनीतिक लाभ लेने के लिए इसके बाद 2019 से 2023 के कार्यकाल श्रम मंत्री
अनूप धानक ने पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया। मजदूरों से 90 दिन की वर्क-स्लिप
ऑनलाइन निकलवाकर हस्ताक्षर करवाए गए। सरकारी विभागों के अधीकारीयो द्वारा 2022 से पहले
इन्हीं रिकॉर्डों के आधार पर मजदूरों का पंजीकरण भी हुआ और उन्हें बोर्ड की सुविधाएँ
भी मिलीं। लेकिन 2022 के बाद अचानक नियम बदले गए और मजदूरों से डिजिटल वर्क-स्लिप की
नई शर्त थोप दी गई। वर्क-स्लिप सत्यापन की शक्ति पंचायत सचिव, पटवारी, लेबर इंस्पेक्टर
आदि अधिकारियों को दे दी गई, जिससे मजदूर पूरी तरह अधिकारियों की मनमर्जी पर निर्भर
हो गया। आज तकनीकी और मजदूर-विरोधी प्रक्रिया के आधार पर 87 प्रतिशत मजदूरों
को फर्जी बताया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि न इतना बड़ा कोई घोटाला है और न ही
मजदूर फर्जी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

