मुख्य चुनाव आयुक्त सरकारी एजेंट के रूप में कर रहे काम : बघेल

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मुख्य चुनाव आयुक्त सरकारी एजेंट के रूप में कर रहे काम : बघेल


-एसआईआर के नाम पर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहा चुनाव आयोग

चंडीगढ़, 27 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी जितेंद्र बघेल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के साथ भाजपा एजेंट के तौर पर काम रहे हैं। चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा विभिन्न मामलों में 14 आपत्तियां दर्ज कराने से स्पष्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त संवैधानिक संस्था के नियमों के साथ जनभावनाओं से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।

रविवार काे चंडीगढ़ में जारी बयान में उन्होंने कहा कि वोट लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन चुनाव आयोग एसआईआर (मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण) के नाम पर पर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहा है। मतदाता सूची से जुड़े किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर की गई जा रही गड़बड़ियों से चुनाव की कार्य प्रणाली से जनता का भरोसा उठ चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनावी साफ्टवेयर पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव कराने के साथ-साथ देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना भी है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हरियाणा और महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, असामान्य तरीके से मतदाताओं के नाम जुड़ने-हटने तथा केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के उपयोग का मुद्दा पहले भी प्रमाणों के साथ उठा चुके हैं। बिहार में एसआईआर के दौरान करीब 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब हो गए, पश्चिम बंगाल में लाखों वोटर्स को पोलिंग से दूर रखा गया। हरियाणा और दिल्ली में बड़ी संख्या में वोटर्स को एसआईआर के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

हरियाणा कांग्रेस के सह प्रभारी ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है, लेकिन किसी पात्र नागरिक का मताधिकार तकनीकी त्रुटि, अपारदर्शी सॉफ्टवेयर अथवा यांत्रिक प्रक्रिया के कारण नहीं छीना जा सकता। कांग्रेस की मांग है कि किसी भी नाम को पर्याप्त नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई और कारणयुक्त आदेश के बिना न हटाया जाए, सभी फॉर्म-7 का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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