645 करोड़ का बैंक घोटाला: चार्जशीट में देरी पर बैंक घोटाले के आरोपी को मिली जमानत

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चंडीगढ़, 14 जून (हि.स.)। हरियाणा के बहुचर्चित 645 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में सीबीआई द्वारा देरी से चार्जशीट फाइल किए जाने पर एक आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिल गई है। बैंक घोटाले की जांच में सीबीआई के लिए यह बड़ा झटका है। पंचकूला की अदालत ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के पूर्व कंट्रोलर (फाइनेंस एंड अकाउंट्स)राजेश सांगवान को पंचकूला अदालत ने डिफॉल्ट बेल दे दी है। अदालत ने यह जमानत शनिवार को दी है। जिसके बारे में देर रात आदेश जारी हुए हैं।अदालत ने माना कि कानून में तय अवधि के भीतर उनके खिलाफ अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल नहीं की गई, इसलिए उन्हें जमानत का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो गया। यह मामला उस कथित बैंकिंग साजिश से जुड़ा है जिसमें सरकारी धन को निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने के आरोप हैं। शुरुआती जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने की थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। राजेश सांगवान की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी पहली रिमांड 15 मार्च को हुई थी और 90 दिन की वैधानिक अवधि 12 जून को पूरी हो चुकी थी। बचाव पक्ष ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा तय अवधि में अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार स्वत: मिल जाता है। साथ ही यह भी तर्क रखा गया कि जांच स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से सीबीआई को स्थानांतरित होने या बाद में पुलिस रिमांड मिलने से कानूनी समयसीमा दोबारा शुरू नहीं होती। वहीं सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि आरोपी निर्धारित अवधि तक हिरासत में रह चुका है और उसके खिलाफ अंतिम रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। ऐसे में कानून के तहत उसे डिफॉल्ट बेल का अधिकार प्राप्त हो चुका है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दाखिल हो जाने या पूरक रिपोर्ट आने से उस आरोपी का अधिकार प्रभावित नहीं होता, जिसके मामले में जांच अब भी लंबित है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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