सीबीआई काेर्ट में पूर्व आईएएस प्रदीप कुमार की जमानत याचिका खारिज
-अधिक ब्याज देने वाले बैंकों की अनदेखी कर आईडीएफसी को पहुंचाया लाभ
-सीबीआई कोर्ट ने जमानत याचिका पर उठाए सवाल
चंडीगढ़, 15 अक्टूबर (हि.स.)। सीबीआई की पंचकूला स्थित विशेष अदालत ने बैंक घोटाले के आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। प्रदीप इस समय जेल में हैं। बैंक घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई ने प्रदीप कुमार को सेवानिवृत्ति वाले दिन गिरफ्तार किया था।
यह मामला 657 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 159.86 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप है। सीबीआई ने कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया और आरोपी बैंकरों के साथ मिलकर इस कथित धोखाधड़ी को अंजाम देने में मदद की।
2011 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पद पर रहे। इसी दौरान यह कथित धोखाधड़ी हुई थी।
सीबीआई के अनुसार, कुमार ने पांच निवेश चक्रों के दौरान बैंकों द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों के तुलनात्मक चार्ट तैयार किए। आरोप है कि उन्होंने बार-बार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सिफारिश की, जबकि अन्य बैंकों की ओर से बेहतर (अधिक) ब्याज दरों की पेशकश की गई थी। उन्होंने कोटेशन में विसंगतियों और तय निवेश सीमाओं को भी नजरअंदाज कर दिया।
पहले चक्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। दूसरे चक्र में, 'जना स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 3 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि पर 8.45 प्रतिशत की सबसे अधिक ब्याज दर की पेशकश की थी। प्रदीप कुमार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को फायदा पहुंचाने के लिए तुलनात्मक चार्ट में 'जना स्मॉल फाइनेंस बैंक' की ब्याज दर को कम करके दिखाया। इसके अलावा, 50 करोड़ रुपये की तय निवेश सीमा पहले ही पूरी हो चुकी थी, फिर भी उन्होंने उसी बैंक में 17.90 करोड़ रुपये और निवेश करने की सिफारिश कर दी।
तीसरे चक्र में, कुमार ने कथित तौर पर 7.10 प्रतिशत की ब्याज दर वाले एक ऐसे कोटेशन के आधार पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 37.78 करोड़ रुपये निवेश करने की सिफारिश की, जिस पर कोई हस्ताक्षर नहीं थे। एजेंसी के अनुसार इंडसइंड बैंक ने भी यही ब्याज दर दी थी, और नियमों के मुताबिक, समान ब्याज दर देने वाले बैंकों के बीच फंड को बराबर बांटना जरूरी था। इस प्रकार से कई क्रमों में आईडीएफसी को लाभ पहुंचाया गया। सीबीआई ने कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों द्वारा किए गए कथित अपराधों में मदद की और अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

