बैंक घोटाले में लेबर वेलफेयर बोर्ड के दो अधिकारी गिरफ्तार
चंडीगढ़, 08 जुलाई (हि.स.)। बैंक घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अब जांच के दायरे को बढ़ाते हुए हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड के अकाउंट्स ऑफि़सर और एक अकाउंटेंट को गिरफ़्तार किया है। पकड़े गए आरोपितों को बुधवार देर शाम अदालत में पेश करके सीबीआई ने दो दिन के रिमांड पर लिया है। आरोपितों पर हरियाणा लेबर वेलफ़ेयर बोर्ड के बैंक अकाउंट से 50.05 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है, जो इसी बैंक घोटाले का हिस्सा है।
सीबीआई के अनुसार दोनों आरोपितों अकाउंट्स ऑफि़सर जुगल किशोर और अकाउंट्स क्लर्क अमित कुमार- को बुधवार को पंचकूला में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
सीबीआई के अनुसार जुगल किशोर 21 अगस्त, 2024 से लेबर वेलफ़ेयर बोर्ड में अकाउंट्स ऑफि़सर के तौर पर काम कर रहे थे। वह बोर्ड के सभी फ़ाइनेंस से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार थे। आईडीएफसी फ़स्र्ट बैंक, सेक्टर 32, चंडीगढ़ में खुले बैंक अकाउंट के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज़्ड सिग्नेटरी) थे। उन्होंने बैंकों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था। बैंकों के साथ सभी लेटर, चेक और बातचीत से जुड़े कागज़ात पर साइन किए थे।
पकड़ा गया दूसरा आरोपित अमित कुमार 1 जनवरी 2019 से लेबर वेलफेयर बोर्ड में अकाउंट्स क्लर्क के तौर पर काम कर रहा था। उन्होंने बोर्ड के फंड को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने के लिए नोट-शीट तैयार की और बैंकों से कोटेशन मंगाने और फिक्स्ड डिपॉजिट खोलने के लिए लेटर का ड्राफ्ट बनाया। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि बैंक में अनऑथराइज्ड सेविंग्स अकाउंट खोलने और 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा के फ्रॉड को छिपाने में उनकी अहम भूमिका थी।
अमित कुमार के वकील यवनीत ढाकला ने कहा कि वह सिर्फ़ एक क्लर्क थे, न कि ऑथराइज्ड सिग्नेटरी। उन्होंने कहा कि घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, उनकी कस्टडी का विरोध किया। अब सीबीआई यह पता लगाना चाहती है कि बिना किसी डिपार्टमेंटल रिकॉर्ड या मंजूरी के बैंक अकाउंट कैसे और किसके कहने पर खोला गया और आरोपित को मिली अवैध रकम के बारे में भी जानकारी जुटाना चाहती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

