हिसार : एआई व डिजिटल तकनीक उच्च शिक्षा को दे सकती नई दिशा : कुलपति प्रो. विजय कुमार
जीजेयू में यूजीसी प्रायोजित दो-सप्ताह के ऑनलाइन अंतरविषयी पुनश्चर्या पाठ्यक्रम
का शुभारंभ, 17 राज्यों के 90 शिक्षक ले रहे हिस्सा
हिसार, 11 सितंबर (हि.स.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों का विवेकपूर्ण
एवं जिम्मेदार इस्तेमाल उच्च शिक्षा में शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दे
सकता है। बदलती तकनीक के दौर में शिक्षकों का अपडेट रहना जरूरी है, क्योंकि अपडेट शिक्षक
ही विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकता है।
यह बात गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
विजय कुमार ने शुक्रवार काे विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी)
की ओर से इमर्जिंग एजुकेशनल टेक्नोलॉजीज, ई-कंटेंट डवलपमेंट एंड एआई-इनेबल्ड टीचिंग
एंड रिसर्च विषय पर आयोजित यूजीसी प्रायोजित दो-सप्ताह के ऑनलाइन अंतरविषयी पुनश्चर्या
पाठ्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कही। पाठ्यक्रम 23 सितंबर तक चलेगा। इसमें देश के 17
राज्यों के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से 90 शिक्षक भाग ले रहे हैं।
कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा कि नई तकनीकों के साथ कई चुनौतियां भी सामने
आ रही हैं। इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को तकनीक के सही और
जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में जागरूक करें। उन्होंने शिक्षकों से नई तकनीक अपनाने
के साथ विद्यार्थियों में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन
और अकादमिक नैतिकता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि बदलते शैक्षणिक परिदृश्य
में शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास जरूरी है। उन्होंने एमएमटीटीसी की इस पहल
की सराहना करते हुए प्रतिभागियों से इसका अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. जय भगवान यादव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और
उभरती शैक्षणिक तकनीकें उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रही हैं। इनका इस्तेमाल
केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि शिक्षण को अधिक प्रभावी, रचनात्मक, समावेशी
और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

