यमुनानगर : कोयला संकट से जूझ रहा ईंट-भट्ठा उद्योग, उत्पादन पर खतरा

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यमुनानगर : कोयला संकट से जूझ रहा ईंट-भट्ठा उद्योग, उत्पादन पर खतरा


यमुनानगर : कोयला संकट से जूझ रहा ईंट-भट्ठा उद्योग, उत्पादन पर खतरा


यमुनानगर, 18 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर जिले में कोयले की महंगाई और आपूर्ति में अनियमितता ने ईंट-भट्ठा उद्योग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई भट्ठा संचालकों को उत्पादन प्रभावित होने का डर सता रहा है। इसी विषय को लेकर व्यासपुर में जिला ईंट-भट्ठा एसोसिएशन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योग से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधान बीर सिंह ने कहा कि विदेशी कोयले की दरों में लगातार वृद्धि के साथ-साथ कर भार ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में कोयले के दामों में लगभग 45 से 50 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है, जिससे उत्पादन लागत असंतुलित हो गई है। इसके अलावा समय पर आपूर्ति न मिलने से भट्ठों का संचालन प्रभावित हो रहा है। संचालकों ने आशंका जताई कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो कई इकाइयों में कामकाज ठप पड़ सकता है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों की गति पर पड़ेगा और आम लोगों के लिए भी लागत बढ़ सकती है। बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों ने कहा कि पहले से ही 18 प्रतिशत जीएसटी के कारण आर्थिक दबाव बना हुआ था, अब कच्चे माल की कमी ने स्थिति और गंभीर कर दी है। उन्होंने इसे उद्योग के लिए दोहरी चुनौती बताया है।

पवन कुमार ने कहा कि उत्पादन रुकने की स्थिति में हजारों श्रमिकों, कारीगरों और इससे जुड़े अन्य वर्गों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि कोयले की आपूर्ति को तत्काल व्यवस्थित किया जाए। साथ ही जीएसटी दर में कमी कर इसे 5 प्रतिशत श्रेणी में लाया जाए, ताकि उद्योग को राहत मिल सके। प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के सामान्य होने तक विशेष सहायता पैकेज की भी मांग उठाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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