थ्री-लेयर सत्यापन, बायोमेट्रिक और जियो-फेंसिंग से खरीद व्यवस्था हुई मजबूत : नायब सैनी
जिला उपायुक्त होंगे मंडियों में खरीद के प्रभारी, सीनियर आईएएस करेंगे निगरानीचंडीगढ़, 08 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा में गेहूं खरीद के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए जा रहे हंगामे पर पलटवार करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी आज खुद फ्रंट पर आए। बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष खरीद व्यवस्था को लेकर बेवजह दुष्प्रचार कर किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों की मंडियों की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उपायुक्तों (डीसी) को जिला स्तर पर खरीद व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है। मंत्री और विधायक भी लगातार मंडियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने आढ़तियों से भी अपील की कि वे किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा से ऊपर उठकर किसानों के हित में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने तीन-स्तरीय फसल सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत खरीद केंद्रों पर लाई गई फसल का किसान द्वारा पंजीकृत फसल से मिलान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे फसल सत्यापन प्रक्रिया अधिक सटीक और विश्वसनीय बनेगी। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल तक मंडियों में लाई गई गेहूं का 75 प्रतिशत बायोमेट्रिक सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 3 नामांकित व्यक्तियों को भी बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुमति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया गया है। इससे अनधिकृत उपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी और लोकेशन आधारित निगरानी प्रणाली और मजबूत होगी। अब तक 416 गेहूं मंडियों, 112 सरसों मंडियों तथा अधिक आवक की स्थिति से निपटने के लिए 179 अतिरिक्त स्थलों की जियो-फेंसिंग पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 1,344 भंडारण स्थलों (स्टोरेज प्वाइंट्स) की भी जियो-फेंसिंग की गई है, जिससे खाद्यान्नों का सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित भंडारण सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि मंडियों में माल की ट्रेसेब्लिटी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और वाहन/लोड की फोटो दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडी से स्टॉक बाहर ले जाने से पहले एग्जिट गेट पास के लिए ट्रांसपोर्ट और मार्केट कमेटी सचिव दोनों की अनिवार्य स्वीकृति सुनिश्चित की गई है। इस बहु-एजेंसी सत्यापन प्रणाली से स्टॉक की सुरक्षित और प्रमाणित आवाजाही संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल, 2026 तक 1,74,635 एग्जिट गेट पास बिना किसी समस्या के जारी किए जा चुके हैं, जो नई व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

