हिसार : सरकारी खाल तोड़ने वालों की जमानत याचिका खारिज

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हिसार, 03 जनवरी (हि.स.)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश

खत्री सौरभ की कोर्ट ने बरवाला क्षेत्र के गांव सरसौद में सरकारी खाल को तोड़ने के सात

आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया

कि यह मामला गंभीर है और अग्रिम जमानत देने से जांच प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला पिछले वर्ष

10 दिसंबर को उप-मंडल नहर अधिकारी, बरवाला की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में

बताया गया कि गांव सरसौद में 58000-टेल बधावड़ रजवाहा पर स्थित करीब 12 एकड़ लंबे पक्के

खाल को आरोपियों ने 20 अक्टूबर 2025 को ध्वस्त कर दिया था। यह खाल पिछले 40 वर्षों

से अस्तित्व में था और इसे तोड़ने से कई किसानों के खेतों की सिंचाई रुक गई। अधिकारी

ने खुद मौके का निरीक्षण कर नुकसान की पुष्टि की थी। जमानत के लिए याचिका दायर करने वालों में सरसौद

निवासी प्रदीप, मनीष कुमार, अनिल, कुलदीप सिंह, जयपाल, अंकुश और संदीप शामिल थे। आरोपियों

के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उनका इस घटना से

कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी जांच में शामिल होने के लिए तैयार

हैं।

सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए

तर्क दिया कि यदि आरोपियों को अग्रिम जमानत दी गई, तो वारदात में इस्तेमाल किए गए औजारों

व हथियारों की बरामदगी नहीं हो पाएगी और जांच पर बुरा असर पड़ेगा। अदालत ने शनिवार काे दोनों पक्षों

को सुनने के बाद कहा कि आरोपियों के नाम एफआईआर में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। अग्रिम

जमानत केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जाती है, जहां मामला झूठा प्रतीत होता हो लेकिन

यहां ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला। मामले की तह तक जाने और अन्य दोषियों की संलिप्तता

का पता लगाने के लिए उचित जांच जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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