हिसार : सरसों वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड व डॉ. विनोद गोयल व डॉ. राजबीर मेडल से सम्मानित
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने
वैज्ञानिकों को दी बधाई
हिसार, 06 मार्च (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं तिलहन अनुभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष डॉ. राम अवतार को सरसों
फसल में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से तथा सहायक वैज्ञानिक
डॉ. विनोद गोयल को सरसों पर उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए गोल्ड मेडल तथा तकनीकी सहायक
डॉ. राजबीर को सरसों की फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन की उत्कृष्ट मौखिक प्रस्तुति के लिए
द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान उन्हें दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय
तिलहन सम्मेलन के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रदान किए गए। ये पुरस्कार
भूतपूर्व महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने प्रदान किए। इस अवसर पर उप महानिदेशक
(फसल) डॉ. डीके यादव, उप महानिदेशक (बागवानी), डॉ. संजय कुमार, सहायक महानिदेशक (तिलहन
एवं दलहन) डॉ. संजीव कुमार गुप्ता तथा विभिन्न तिलहन संस्थानों के निदेशक एवं भूतपूर्व
निदेशक डॉ. धीरज सिंह भी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने
शुक्रवार काे इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी आप इसी लग्न
से अपना काम करते रहेंगे। डॉ. राम अवतार पिछले 15-16 वर्षों से तिलहन अनुभाग में सरसों
फसल पर शोध कार्य कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले 6 से 7 वर्षों में सरसों की छह
नई किस्में विकसित की हैं। इनमें आरएच 725, आरएच 761, आरएच 1424, आरएच 1706 तथा आरएच
1975 प्रमुख हैं। कुलपति ने बताया कि आरएच 725 देश में परिवर्तन लाने वाली किस्म है।
यह किस्म देश के 5-6 राज्यों में बहुत ही प्रचलित है और अच्छी पैदावार देती है। इस
किस्म में मोटा दाना और अधिक फलियों की विशेषता है। वहीं आरएच 1706 उच्च गुणवत्ता वाले
तेल के लिए जानी जाती है, जिसमें इरूसिक अम्ल की मात्रा 2 प्रतिशत से भी कम है। आरएच
1975 किस्म कम अवधि में अधिक उत्पादन देने, लंबी फलियों और घनी शाखाओं के कारण किसानों
में लोकप्रिय हो रही है। इन किस्मों के विकसित होने से हरियाणा राज्य के सरसों उत्पादन
में अद्वितीय वृद्धि हुई है जो कि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि
विश्वविद्यालय के सरसों वैज्ञानिकों द्वारा अब तक राई व सरसों की 25 किस्में विकसित
की गई हैं। पिछले 12 वर्षों में इस टीम को सरसों में उत्कृष्ट कार्य के लिए चार बार
उत्कृष्ट केन्द्र अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि हरियाणा की औसत
पैदावार 1972-73 में 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो अब बढ़ कर 2201 किलोग्राम
प्रति हेक्टेयर तक जा चुकी है, जोकि एक बड़ी उपलब्धि है तथा वैज्ञानिकों और किसानों
ने की दिन-रात मेहनत का परिणाम है। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश
गोयल व डॉ एस.के. पाहुजा उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

