हिसार : गुरुग्राम-नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देना सार्वजनिक क्षेत्र पर हमला : संपत सिंह

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हिसार : गुरुग्राम-नूंह में बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देना सार्वजनिक क्षेत्र पर हमला : संपत सिंह


मुनाफे वाले उपभोक्ता निजी कंपनी के पास और किसानों-गरीबों का बोझ सरकारी निगम

पर छोड़ने की तैयारी

पूर्व मंत्री ने 25 साल के लाइसेंस पर उठाए सवाल

हिसार, 20 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) की ओर

से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर

बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले पर पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कड़ी आपत्ति

जताई है। उन्होंने इसे सार्वजनिक बिजली क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं के हितों पर गंभीर

चोट बताते हुए आरोप लगाया कि इस फैसले से निजी कंपनियों के लिए मुनाफे वाले बाजार खोलने

और किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं तथा गरीब परिवारों की जिम्मेदारी सार्वजनिक बिजली वितरण

निगमों पर छोड़ने का रास्ता तैयार होगा।

प्रो. संपत सिंह ने मंगलवार काे जारी बयान में कहा कि बिजली कोई सामान्य व्यापारिक

वस्तु नहीं, बल्कि हर घर, खेत, अस्पताल, स्कूल और उद्योग की बुनियादी जरूरत है। ऐसे

में बिजली वितरण व्यवस्था को केवल मुनाफे के नजरिये से देखना जनहित के सिद्धांतों के

विपरीत है। हरियाणा में एक ही क्षेत्र में दो बिजली वितरण एजेंसियों

को काम करने की अनुमति देने का यह फैसला दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। अब तक संबंधित

क्षेत्र में बिजली वितरण की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के निगम या निजी लाइसेंसधारी

के पास रहती थी। समानांतर वितरण व्यवस्था लागू होने से बिजली क्षेत्र में नई प्रतिस्पर्धा

की स्थिति बनेगी, लेकिन इसका वास्तविक लाभ किसे मिलेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। उन्होंने

आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं को विकल्प देने के नाम पर लिया गया यह निर्णय वास्तव में

सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड

(डीएचबीवीएनएल) के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यहां बिजली वितरण में होने

वाली हानियां भी अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में निजी कंपनी को प्रवेश देने

से लाभदायक उपभोक्ताओं को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। उनके अनुसार, निजी कंपनी

औद्योगिक, वाणिज्यिक और शहरी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे सकती है, जबकि किसानों, ग्रामीण

परिवारों, छोटे घरेलू उपभोक्ताओं और दूरदराज के क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने की जिम्मेदारी

सार्वजनिक निगम पर बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में लंबे समय से

क्रॉस-सब्सिडी की भूमिका रही है, जिसके माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं

के बीच लागत और राजस्व का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि सार्वजनिक निगम के

पास अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं का हिस्सा घटता है और सामाजिक दायित्वों का बोझ

पहले की तरह बना रहता है, तो उसकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति

में राज्य सरकार पर सब्सिडी का दबाव बढ़ने और भविष्य में बिजली दरों को लेकर आम उपभोक्ताओं

पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

Livevns.news Desk
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