अंबेडकर की सोच बनी विश्व के लिए मार्गदर्शक : राजा शेखर वुंडरू

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अंबेडकर की सोच बनी विश्व के लिए मार्गदर्शक : राजा शेखर वुंडरू


-यूएन में गूंजे डॉ.अंबेडकर के विचार

चंडीगढ़, 15 अप्रैल (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हरियाणा में परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएएस डॉ.राजा सेखर वुंडरू ने भाग लिया।वुंडरू ने कहा कि अंबेडकर के विचारों को वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अंबेडकर केवल भारत के संविधान निर्माता नहीं थे, बल्कि एक ऐसे वैश्विक चिंतक थे, जिनकी सोच आज के जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भी मार्गदर्शन प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि अंबेडकर की संवैधानिक नैतिकता केवल एक सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन और शासन व्यवस्था का आधार है। उन्होंने नागरिकों और संस्थाओं के बीच संतुलन, समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस ढांचा प्रस्तुत किया, जो आज भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और भारतीय संविधान के बीच समानताओं पर भी प्रकाश डाला गया। डॉ. राजा शेखर वुंडरू ने कहा कि अंबेडकर ने सामाजिक और आर्थिक समानता को लोकतंत्र की सफलता के लिए अनिवार्य माना। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समाज में असमानता बनी रहती है, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाएगा। यही सोच आज भी वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश देती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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