हिसार के गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय ने सी एंड लैब के साथ किया समझौता
बाल अधिकारों को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा
में महत्वपूर्ण पहल
विश्वविद्यालय का उद्देश्य ज्ञान-आधारित एवं
संवेदनशील मानव संसाधन तैयार करना : प्रो. नरसी राम बिश्नोई
हिसार, 24 मार्च (हि.स.)। बाल संरक्षण एवं बाल
अधिकारों को अकादमिक ढांचे में संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते
हुए गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने सेंटर फॉर लीगल एक्शन
एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी एंड लैब), नई दिल्ली के साथ एक समझौता ज्ञापन
(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के माध्यम से बाल अधिकारों को मुख्यधारा शिक्षा
से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की गई है।
समझौते पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी
राम बिश्नोई एवं इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन (आईसीपी) के ट्रस्टी रजत कुमार ने हस्ताक्षर
किए। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. विजय कुमार, डीन इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. ओपी सांगवान
तथा अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने
मंगलवार काे कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ज्ञान-आधारित एवं संवेदनशील मानव संसाधन तैयार करना
है। यह समझौता हमारे उस विजन को सुदृढ़ करता है, जिसके माध्यम से हम ऐसे पेशेवर तैयार
करना चाहते हैं जो नीति निर्माण, कानून प्रवर्तन, मीडिया एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों
में बाल संरक्षण को सशक्त बना सकें।
कुलसचिव डॉ. विजय कुमार ने कहा कि यह समझौता
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नवाचार एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता
है। इससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख एवं समाजोपयोगी शिक्षा प्राप्त होगी।
डीन इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. ओपी सांगवान ने
कहा कि इस प्रकार के सहयोग विश्वविद्यालय को वैश्विक शैक्षणिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं
और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में बाल अधिकारों को
समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की एसोसिएट डायरेक्टर
(ट्रेनिंग) डॉ. संगीता गौर ने कहा कि यह साझेदारी जमीनी वास्तविकताओं और अकादमिक ज्ञान
के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होगी। इसमें बाल विवाह, मानव तस्करी, बाल श्रम,
ऑनलाइन सुरक्षा एवं कानूनी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा स्तर पर
बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। साथ ही कौशल
विकास, परिणाम-आधारित प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट सहायता एवं संयुक्त शोध कार्य
भी संचालित किए जाएंगे। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र
(सीडीओई) के माध्यम से संचालित होंगे, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल
सके।
समझौते के अनुसार सी एंड लैब पाठ्यक्रमों की
रूपरेखा, सिलेबस, समय-निर्धारण, अवधि एवं पात्रता मानदंड तैयार करेगा तथा तकनीकी विशेषज्ञता
प्रदान करेगा। वहीं, विश्वविद्यालय आवश्यक नीतिगत निर्णय, आधारभूत संरचना एवं शैक्षणिक
वातावरण उपलब्ध कराएगा। यह पहल शैक्षणिक ज्ञान को जमीनी अनुभव से जोड़ने का कार्य करेगी।
समझौते में विवाद निवारण, कानूनी अनुपालन एवं कार्यान्वयन से संबंधित प्रावधान भी शामिल
किए गए हैं, जिनका क्षेत्राधिकार हिसार रहेगा।
लगभग 30 वर्षों की समृद्ध विरासत, 52 हजार से
अधिक विद्यार्थियों एवं 372 एकड़ में फैले परिसर के साथ यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय
मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ए$़ ग्रेड प्राप्त कर चुका है। वर्ष 2025 के
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के अनुसार यह देश के शीर्ष 50 राज्य
विश्वविद्यालयों में शामिल है तथा हरियाणा का नंबर एक सरकारी विश्वविद्यालय है। वर्तमान
में विश्वविद्यालय 100 से अधिक पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

