हिसार : अब देशभर के किसानों तक पहुंचेगी एचएयू की उन्नत सरसों किस्म ‘आरएच-1975’

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हिसार : अब देशभर के किसानों तक पहुंचेगी एचएयू की उन्नत सरसों किस्म ‘आरएच-1975’


11-15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता वाली किस्म के व्यावसायिक विस्तार

को मिलेगी रफ्तार, किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण बीज

हिसार, 03 अगस्त (हि.स.)। यहां के हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने अपनी

विकसित उन्नत सरसों किस्म ‘आरएच-1975’ को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की दिशा

में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने इस किस्म के बीज के उत्पादन एवं

वितरण के लिए केडीएम सीड्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, खांडवा के साथ लाइसेंस

समझौता किया है। इस समझौते से हरियाणा सहित उत्तर भारत के किसानों को उच्च गुणवत्ता

वाले प्रमाणित बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।

हकृवि के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने साेमवार काे कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक लगातार

विभिन्न फसलों की उच्च उत्पादक और बेहतर गुणवत्ता वाली किस्में विकसित कर रहे हैं।

इन किस्मों को निजी क्षेत्र के सहयोग से किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता

है, ताकि किसान आधुनिक तकनीक और विश्वसनीय बीजों का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ा सकें। इससे

न केवल खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। सरसों की उन्नत किस्म ‘आरएच-1975’ के लिए हुए इस समझौते पर विश्वविद्यालय की

ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग तथा कंपनी की ओर से चेयरमैन सुभाष महता ने हस्ताक्षर

किए। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज विशेष रूप से उपस्थित रहे।

किसानों के लिए क्यों खास है ‘आरएच-1975’

‘आरएच-1975’ सरसों की

ऐसी उन्नत किस्म है, जिसकी औसत उत्पादन क्षमता 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तथा अनुकूल

परिस्थितियों में 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है। इस किस्म में लगभग

39.5 प्रतिशत तेल पाया जाता है, जो इसे अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता वाली किस्म

बनाता है। यही वजह है कि यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह किस्म

हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू तथा उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों के लिए अनुशंसित

है। अब निजी कंपनी के साथ हुए इस समझौते से इन राज्यों के किसानों को इस किस्म का प्रमाणित

बीज अधिक मात्रा में उपलब्ध होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश

गोयल, डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. रमेश यादव, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. राम

अवतार, डॉ. योगेश जिंदल तथा डॉ. पवन सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं

अधिकारी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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