हांसी : टी कनेक्शन से पानी लेने की मांग पर अड़े ग्रामीण

WhatsApp Channel Join Now
हांसी : टी कनेक्शन से पानी लेने की मांग पर अड़े ग्रामीण


दस्तावेजों के साथ सरकार के दावों को दी चुनौती

हांसी, 27 जून (हि.स.)। भाखड़ा पाइपलाइन से पीने के पानी का टी-कनेक्शन देने

की मांग पर चानौत गांव में चल रहा जल आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब ग्रामीणों

ने गांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सरकारी दस्तावेजों और तकनीकी मैनुअल के आधार पर

हरियाणा सरकार के उन दावों को चुनौती दी, जिनमें कहा गया था कि अमृत-2 योजना के तहत

किसी भी गांव को मुख्य पाइपलाइन से बीच में टी-कनेक्शन देने का कोई प्रावधान नहीं है।

शनिवार को आंदोलन के 43वें दिन ग्रामीणों ने दस्तावेज पेश करके मंत्री के बयानों को

झूठा बताया।

पानीपत के अधिवक्ता विजय कुमार ने इस अवसर पर कहा कि जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर

सिंह गंगवा ने हाल ही में बयान दिया था कि यदि अमृत-2 योजना के तहत किसी भी राज्य में

मुख्य पाइपलाइन से किसी गांव को बीच में जलापूर्ति किए जाने का उदाहरण प्रस्तुत कर

दिया जाए तो सरकार चानौत गांव को भी टी-कनेक्शन देने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा

कि ग्रामीणों ने मंत्री की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए संबंधित सरकारी दस्तावेज

और तकनीकी मैनुअल सार्वजनिक किए हैं।

अधिवक्ता विजय कुमार ने दावा किया कि सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरमेंटल

इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन के आधिकारिक मैनुअल में अमृत योजना के अंतर्गत एनरूट विलेज

अर्थात पाइपलाइन के मार्ग में आने वाले गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने का स्पष्ट प्रावधान

किया गया है। उन्होंने बताया कि मैनुअल के अध्याय-16 के पृष्ठ 862 में उल्लेख है कि

शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए कि रास्ते में पड़ने

वाले गांवों को भी पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। वहीं सरकार द्वारा पाइपलाइन के दबाव

पर असर पड़ने की आशंका जताए जाने पर उन्होंने मैनुअल के पृष्ठ 865 का हवाला देते हुए

कहा कि जोनल बैलेंसिंग रिजर्वायर जैसी तकनीक के माध्यम से गांवों को पानी उपलब्ध कराया

जा सकता है, जिससे मुख्य पाइपलाइन के प्रेशर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

वहीं धरना कमेटी सदस्यों ने कहा कि वे सरकार और जिला प्रशासन के साथ किसी भी

समय बातचीत के लिए तैयार हैं तथा प्रशासन की ओर से बुलावा मिलने पर वार्ता में शामिल

होंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं तो खाप

पंचायतों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से आंदोलन को और व्यापक बनाया

जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

Share this story