जींद : सीआरएसयू एडमिशन प्रोस्पेक्टस में पुराने नियमों के उल्लेख से परेशान हुए छात्र

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जींद : सीआरएसयू एडमिशन प्रोस्पेक्टस में पुराने नियमों के उल्लेख से परेशान हुए छात्र


जींद, 27 मई (हि.स.)। सीआरएसयू विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों के लिए हरियाणा सरकार के नवीनतम नियमों की अनदेखी किए जाने के मामले को एबीवीपी ने गंभीरता से उठाया। हरियाणा सरकार द्वारा 14 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए वार्षिक आय सीमा को छह लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दिया गया था। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य अधिक से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करना था लेकिन चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद द्वारा जारी किए गए एडमिशन प्रोस्पेक्टस में पुराने नियमों का उल्लेख किया गया था। जिसमें ईडब्ल्यूएस की आय सीमा अभी भी छह लाख रुपये दर्शायी गई थी। इससे अनेक विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई तथा हजारों पात्र विद्यार्थी अपने अधिकारों से वंचित होने की आशंका में थे।

बुधवार को जानकारी देते हुए एबीवीपी जींद विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष सतविंदर ढिल्लो ने बताया कि जैसे ही इस गंभीर त्रुटि को देखा तो तुरंत मामले को संज्ञान में लिया गया। तुरंत प्रभार से विश्वविद्यालय प्रशासन को इस गलती से अवगत करवाया। एबीवीपी पदाधिकारियों ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से बताया कि हरियाणा सरकार का नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और विश्वविद्यालय को उसी के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया संचालित करनी चाहिए। यदि समय रहते इस गलती को नहीं सुधारा जाता तो अनेक गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित होना पड़ता। परिषद ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही सीधे विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत प्रभाव से अपनी गलती को सुधार दिया। प्रशासन द्वारा एडमिशन प्रक्रिया में संशोधन करते हुए ईडब्ल्यूएस श्रेणी की नई आय सीमा आठ लाख रुपये लागू कर दी गई। एबीवीपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रोहन सैनी ने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार का प्रोस्पेक्टस या अधिसूचना जारी करने से पहले सभी सरकारी नियमों और संशोधनों की पूर्ण जांच सुनिश्चित की जाए ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा

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