हिसार : कुलपतियों का सम्मेलन कृषि शिक्षा, अनुसंधान व नवाचार को नई दिशा देगा : डॉ. मनमोहन सिंह

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हिसार : कुलपतियों का सम्मेलन कृषि शिक्षा, अनुसंधान व नवाचार को नई दिशा देगा : डॉ. मनमोहन सिंह


आईएयूए का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के उत्कृष्ट कार्यों को सांझा करना एवं

चुनौतियों का हल निकालना : डॉ. मनमोहन सिंह

हकृवि में कुलपतियों के 49वें सम्मेलन का हुआ समापन

हिसार, 06 जनवरी (हि.स.)। आईएयूए के अध्यक्ष एवं जीबीपीयूएटी पंतनगर के कुलपति

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि कुलपतियों का सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि

देश में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने वाला मंच है। जो अंतत: किसानों,

विद्यार्थियों और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि देश में

74 कृषि विश्वविद्यालय हैं जो कि कृषि क्षेत्र में नवीनतम तकनीक एवं उन्नत किस्म विकसित

करने, बागवानी की पैदावार बढ़ाने, पशुपालन एवं मत्स्य पालन संबंधी उन्नत पद्यतियां

विकसित करने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. मनमोहन सिंह मंगलवार को यहां एचएयू में इंडियन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी

एसोसिएशन (आईएयूए) की ओर से आयोजित किए गए दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर पर संबोधन

दे रहे थे। सम्मेलन में देश के कृषि, बागवानी, पशुपालन तथा मत्स्य पालन विश्वविद्यालयों

के कुलपतियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने, उत्पादन बढ़ाने,

पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तथा नवाचारों को बढ़ावा देना भी इन विश्वविद्यालयों

की अह्म जिम्मेवारी बन चुका है। उन्होंने बताया कि आईएयूए का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग

विश्वविद्यालयों द्वारा किए उत्कृष्ट कार्यों को सांझा करना, कार्यों में आ रही चुनौतियों

का हल निकालने के लिए सरकार के साथ तालमेल स्थापित करके समाधान सुनिश्चित करना है ताकि

विश्वविद्यालय और अधिक बेहतर ढंग से अपना कार्य कर सकें।

कृषि शिक्षा को समयानुकूल, रोजगारपरक और तकनीक आधारित बनाना उद्देश्य : प्रो.

बीआर कम्बोज

हकृवि कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र

बनाने में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका के रोडमैप पर सम्मेलन में चर्चा की गई। उन्होंने

आईएयूए का धन्यवाद करते हुए कहा कि नवीनतम तकनीकों को एक दूसरे से सांझा करने एवं कृषि

संबंधी चुनौतियों का समाधान निकालने में यह सम्मेलन एक सेतु का कार्य करता है। उन्होंने

आह्वान किया कि सभी विश्वविद्यालय आपस में एमओयू के माध्यम से शोध के क्षेत्र में एक

दूसरे का सहयोग करें तो इसके और बेहतर परिणाम होंगे। इस सम्मेलन की सिफारिशें कृषि

शिक्षा, शोध एवं विस्तार को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के एडीजी डॉ. अजीत सिंह यादव ने

बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत कृषि विश्वविद्यालय स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों

में अपनी आवश्यकता के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक शामिल कर सकते हैं, जिससे विद्यार्थियों

को स्थानीय कृषि समस्याओं का निदान करने की जानकारी मिलेगी। उन्होंने बताया कि कृषि

विश्वविद्यालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के साथ मिलकर अपनी समस्याओं का निदान कर

सकते हैं।

सम्मेलन में आईएयूए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. परविंदर कौशल एवं सचिव डॉ. दिनेश

कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर सम्मेलन में विभिन्न विश्वविद्यालयों

के कुलपति, हकृवि के कुलसचिव सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी

तथा वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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