हिसार : उपचारित जल बनेगा जल संरक्षण का आधार, पुन: उपयोग की ठोस कार्ययोजना हाेगी तैयार

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हिसार : उपचारित जल बनेगा जल संरक्षण का आधार, पुन: उपयोग की ठोस कार्ययोजना हाेगी तैयार


एसटीपी के उपचारित पानी के कृषि व गैर-पेय कार्यों

में उपयोग को लेकर उपायुक्त ने अधिकारियों के साथ किया मंथन

हिसार, 14 अगस्त (हि.स.)। जल संरक्षण को बढ़ावा

देने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन

ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल के अधिकतम

एवं सुरक्षित पुन: उपयोग को लेकर शुक्रवार को उपायुक्त महेंद्र पाल की अध्यक्षता में

बैठक आयोजित की गई। बैठक का समन्वय सीएमजीजीए अमोल ने किया। इसमें उपचारित जल को व्यर्थ

बहाने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर विभिन्न विभागों

के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान

निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग तथा सिंचाई विभाग के अधिकारियों

ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने एसटीपी से निकलने वाले उपचारित जल की गुणवत्ता, कृषि

कार्यों में इसके संभावित उपयोग, अन्य गैर-पेय गतिविधियों में इस्तेमाल तथा इसके लिए

आवश्यक आधारभूत ढांचे को लेकर अपने सुझाव रखे।

उपायुक्त महेंद्र पाल ने कहा कि जल की हर बूंद

का सदुपयोग समय की जरूरत है और उपचारित जल का पुन: उपयोग इस दिशा में प्रभावी कदम साबित

हो सकता है। उन्होंने कहा कि निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले उपचारित

जल का कृषि एवं अन्य गैर-पेय कार्यों में उपयोग किया जाए तो इससे भूजल एवं ताजे जल

स्रोतों पर दबाव कम करने के साथ-साथ जल संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। उन्होंने

संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जिले में उपचारित जल के पुन: उपयोग की संभावनाओं

का व्यापक सर्वेक्षण कर ठोस एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके तहत उपचारित

जल की उपलब्धता, उपयोग के संभावित क्षेत्रों, आवश्यक पाइपलाइन, भंडारण तथा वितरण व्यवस्था

की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि योजना बनाते समय जल की गुणवत्ता

और जनस्वास्थ्य से जुड़े निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए।

बैठक में कृषि विशेषज्ञों ने उपचारित जल के कृषि

क्षेत्र में उपयोग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि उपचारित

जल की गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी आवश्यक है। इसके साथ ही ऐसी फसलों और क्षेत्रों

की पहचान की जानी चाहिए, जहां निर्धारित मानकों के अनुसार उपचारित जल का सुरक्षित उपयोग

किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि हिसार में उपचारित जल के पुन:

उपयोग की प्रभावी व्यवस्था विकसित होने से जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी

मजबूती मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए ऐसी व्यवस्था

विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे उपचारित जल का अधिकतम और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित

हो सके। उन्होंने कहा कि उपचारित जल को केवल अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय एक वैकल्पिक

जल संसाधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इससे भविष्य में जल की बढ़ती जरूरतों

को पूरा करने में मदद मिलेगी और प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भरता भी कम की जा सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

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