हिसार : लुवास में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, डेयरी और खाद्य विज्ञान में गैर-तापीय तकनीक से नैनो-प्रौद्योगिकी तक पर मंथन
विशेषज्ञों ने खाद्य गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण को लेकर साझा किए नए शोध
व तकनीकी अनुभव
हिसार, 05 अक्टूबर (हि.स.)। डेयरी एवं खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में बदलती
उपभोक्ता जरूरतों और तकनीकी विकास के बीच भविष्य की संभावनाओं को लेकर लाला लाजपत राय
पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंथन
हुआ। डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के डेयरी रसायन विभाग की ओर से डेयरी
विज्ञान, खाद्य विज्ञान एवं गुणवत्ता आश्वासन में उभरते रुझान विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने नवीन प्रसंस्करण तकनीकों, कार्यात्मक खाद्य पदार्थों, नैनो-प्रौद्योगिकी,
खाद्य गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में ऑस्ट्रेलिया स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड
की प्रोफेसर निधि बंसल ने ऑनलाइन माध्यम से नेक्स्ट-जेनरेशन डेयरी प्रोसेसिंग: द रोल
ऑफ नॉन-थर्मल टेक्नोलॉजीज एंड नॉन-बोवाइन मिल्क विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने डेयरी
प्रसंस्करण में आधुनिक गैर-तापीय तकनीकों की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश
डाला। उन्होंने बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप नई प्रसंस्करण तकनीकों को अपनाने
की आवश्यकता बताई और भैंस व गाय के अलावा अन्य पशुओं के दूध के बढ़ते महत्व तथा डेयरी
उद्योग में इसके संभावित उपयोगों की जानकारी दी।
दूसरे सत्र में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम, निंगबो, चीन की सहायक प्रोफेसर डॉ.
मीनाक्षी शर्मा ने प्राकृतिक वर्णकों से प्राप्त कार्यात्मक खाद्य पदार्थों के लिए
नैनो-वितरण प्रणालियां विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त
वर्णकों के आधार पर विकसित नैनो-वितरण प्रणालियों की कार्यप्रणाली और संभावनाओं की
जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रणालियों के माध्यम से कार्यात्मक खाद्य पदार्थों
में जैव सक्रिय घटकों की प्रभावशीलता बढ़ाई जा सकती है। खाद्य विज्ञान में नैनो-प्रौद्योगिकी
के बढ़ते महत्व और इसके संभावित अनुप्रयोगों पर भी उन्होंने विचार रखे।
तीसरे सत्र में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की निदेशक एवं स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट
एंड एजुकेशन आउटरीच की प्रमुख, मानक समन्वय एवं निगरानी विभाग की डॉ. नेहा यादव ने
खाद्य उद्योग के लिए भारतीय मानक: शिक्षाविदों, बीआईएस, उद्योग एवं नियामकों के बीच
सहयोग विषय पर विचार रखे।
मुख्य अतिथि लुवास के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि डेयरी
एवं खाद्य विज्ञान तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप
नवीन तकनीकों व अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है। खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा का सीधा
संबंध जनस्वास्थ्य से है, इसलिए वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों को प्रयोगशाला तक सीमित
न रखकर किसानों, पशुपालकों और उद्योग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों
और शोधार्थियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे अनुसंधान से जुड़ने तथा नवाचार को
अपनाने का आह्वान किया।
आयोजन अध्यक्ष एवं डेयरी रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष व प्रधान वैज्ञानिक डॉ.
मीनाक्षी विरमानी ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य डेयरी एवं खाद्य विज्ञान में नवीन
अनुसंधान, तकनीकी विकास और गुणवत्ता मानकों पर चर्चा के साथ विद्यार्थियों व शोधार्थियों
को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से अवगत कराना है। संगोष्ठी में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, उद्योग
विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर

