हरियाणा की मंडियों में किसान हो रहे परेशान:सुरजेवाला

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हरियाणा की मंडियों में किसान हो रहे परेशान:सुरजेवाला


-‘एमएसपी धोखे’ की भेंट चढ़ी मूंग और मक्के की फसल

-मूंग को छह जार और मक्का को 1100 रुपये क्विंटल बेचने को मजबूर

चंडीगढ़, 26 जून (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि किसानों को मूंग व मक्के की फसल एमएसपी से कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। शुक्रवार को चंडीगढ़ में जारी जानकारी में रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि

प्रदेश में मूंग और मक्के की फसलों की आवक शुरू होते ही किसानों के साथ निजी हाथों की लूट का खेल फिर से शुरू हो गया है।

सुरजेवाला ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने मूंग की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,682 प्रति क्विंटल तय किया है। इसके बावजूद, हरियाणा के भाजपाई सिस्टम के तहत मंडियों में मूंग की सरकारी खरीद न के बराबर है। नतीजतन, मजबूर किसानों को अपनी उपज निजी व्यापारियों को 6,000 प्रति क्विंटल तक के औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। किसानों को सीधे तौर पर 2,600 प्रति क्विंटल से अधिक की भारी चपत लगाई जा रही है। सुरजेवाला ने मक्का उत्पादक किसानों की दुर्दशा को उजागर करते हुए कहा कि मौसम की मेहरबानी और किसानों की हाड़-तोड़ मेहनत से इस बार मक्के की पैदावार अच्छी हुई थी। सरकार ने कागजों पर मक्के की एमएसपी 2,410 प्रति क्विंटल घोषित कर रखी है। जमीनी हकीकत यह है कि मंडियों में मक्का 1,100 प्रति क्विंटल के स्तर पर पिट रहा है। किसानों को लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है और उन्हें प्रति क्विंटल करीब 1,300 का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

रणदीप सुरजेवाला ने सरकार के 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद के चुनावी और प्रचारक दावों को एक क्रूर मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समय मक्का और मूंग की सरकारी खरीद की कोई पुख्ता व्यवस्था मंडियों में दिखाई नहीं दे रही है।

हरियाणा के लगभग सभी जिलों में डीएपी और यूरिया खाद का स्टॉक या तो पूरी तरह खत्म हो चुका है,या फिर जरूरत के मुकाबले आपूर्ति न के बराबर है। कृषि विभाग और सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि खाद की नई खेप कब आएगी। सरकार अपनी नाकामी और खाद की भारी तंगी को छुपाने के लिए भूमि रिकॉर्ड, बायोमैट्रिक मिलान और डिजिटल निगरानी जैसे तकनीकी हथकंडे अपना रही है। इन जटिल नियमों के कारण जो थोड़ा-बहुत खाद का स्टॉक उपलब्ध भी है, उसे हासिल करने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। नई खेप आने की तारीख और मौजूदा स्टॉक की जानकारी को जानबूझकर छुपाया जा रहा है, ताकि मंडियों में खाद की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी के धंधे को बढ़ावा दिया जा सके।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा के किसानों को चौतरफा परेशानियों से बांधकर, प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि झूठ का बखान कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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