सेल्फी विद डॉटर पर एआई से गुमशुदा बेटियों को ढूंढने का चलेगा मिशन

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सेल्फी विद डॉटर पर एआई से गुमशुदा बेटियों को ढूंढने का चलेगा मिशन


चंडीगढ़, 11 अप्रैल (हि.स.)। ‘सेल्फी विद डॉटर’ आंदोलन के प्रणेता सुनील जागलान और सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन की नई पहल ‘एआई सेल्फी विद डॉटर’ उन लाखों मां-बाप की आंखों का सपना और दिल की पुकार है, जिनकी बेटियां एक दिन अचानक गुम हो गईं। यह अभियान कृत्रिम बुद्धिमत्ता को महज एक तकनीक नहीं, बल्कि मां-बाप की बेचैनी, उम्मीद और प्यार का माध्यम बनाता है।

जब पूरी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ठंडा और भावनाहीन माना जा रहा है, तब सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन इसे बेटी के प्यार से जोडक़र एक अनोखा मिशन शुरू कर रहा है। यह अभियान उन मां-बाप के आंसुओं को आवाज देता है जो सालों से अपनी बेटी की एक झलक पाने को तरस रहे हैं।

सुनील जागलान ने शनिवार काे जारी जानकारी में कहा कि जब कोई पिता अपनी काल्पनिक बेटी के साथ सेल्फी देखता है, तो उसके मन में एक भावुक तूफान उठता है। वह सोचता है। अगर मेरी बेटी होती तो कैसे दिखती। वह कितनी प्यारी होती। हंसी कैसी होती। इस एक सेल्फी से दिल में बेटी के प्रति अपार प्यार, सम्मान और जिम्मेदारी जागृत होती है। यह अभियान समाज में बेटी के महत्व को बढ़ावा देने का एक बेहद संवेदनशील और प्रभावी तरीका है। यह माता-पिता को एहसास दिलाता है कि बेटी कोई बोझ नहीं, बल्कि घर की रोशनी, परिवार की शान और समाज की ताकत है।

अभियान का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण हिस्सा उन परिवारों के लिए है जिनकी बेटियां गुम हैं। हर रात नींद नहीं आती, हर सांस में बेटी का नाम होता है, हर भीड़ में बस एक ही चेहरा ढूंढा जाता है। एआई सेल्फी विद डॉटर अब इन परिवारों को नई उम्मीद दे रहा है। बेटी का चेहरा, उसकी मुस्कान, उसकी आंखों में छुपी मासूमियत सब कुछ इतना सजीव कि देखने वाला रूह तक कांप जाए।

ये एआई सेल्फियां सोशल मीडिया, पुलिस स्टेशनों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों पर साझा की जा सकेंगी। इससे गुमशुदा लड़कियों की पहचान आसान होगी, लोग उन्हें पहचान सकेंगे और पुलिस-प्रशासन को भी खोजबीन में मदद मिलेगी। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि हर उस मां-बाप की चीख है जो कह रही है। मेरी बेटी जिंदा है, उसे ढूंढो, उसे वापस लाओ।

एआई सेल्फी विद डॉटर अभियान बताता है कि तकनीक अगर सही मकसद से इस्तेमाल की जाए तो कितनी इंसानी हो सकती है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी का सम्मान अभियान से जोड़ता है। यह अभियान उन हजारों गुमशुदा बेटियों के नाम है जो आज भी कहीं अपनी मां की गोद की तलाश में हैं। सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के अनुसार हर बेटी की एक कहानी है और हर बेटी लौट सकती है। जो भी मां-बाप अपनी बेटी को याद करते हुए रोते हैं, जो भी पिता अपनी बेटी की कमी महसूस करते हैं, इस अभियान में शामिल हों। अपनी कल्पना की बेटी से सेल्फी लें या गुमशुदा बेटी की एआई इमेज बनाकर दुनिया को बताएं कि उनकी बेटी अब भी इंतजार कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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