बिजली कंपनियों ने सरचार्ज वसूली के लिए नियम में मांगी ढील

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-फैसले से पहले आयोग करेगा जनसुनवाई

चंडीगढ़, 11 अप्रैल (हि.स.)। हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के समक्ष याचिका दायर करके फ्यूल एंड पावर परचेज एडज़स्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की वसूली के मौजूदा नियमों में बदलाव की मांग की है। आयोग ने इस पर किसी प्रकार का फैसला करने से पहले जनसुनवाई आयोजित करने का ऐलान किया है। यह याचिका उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की तरफ से दायर की गई है।

डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियों) ने आयोग के समक्ष याचिका दायर कर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ‘मल्टी ईयर टैरिफ’ विनियम-2024 के नियम 68 में ढील देने का अनुरोध किया है। वर्तमान नियम के अनुसार, ईंधन और बिजली खरीद की अतिरिक्त लागत की वसूली मासिक आधार पर की जाती है।

बिजली कंपनियों ने प्रस्ताव दिया है कि इस राशि को मासिक आधार पर न वसूलकर आगामी वित्तीय वर्षों में 47 पैसे प्रति यूनिट की समान दर से वसूला जाए। कंपनियों का तर्क है कि इससे लागत की वसूली कैरिंग कॉस्ट (ब्याज लागत) के साथ सुव्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी बदलाव से पहले आम जनता और हितधारकों की राय ली जाएगी। आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी उपभोक्ताओं और स्टेकहोल्डर्स को अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करने का अवसर दिया है। आयोग के अनुसार जो भी व्यक्ति या संस्था इस याचिका के पक्ष या विपक्ष में अपनी बात रखना चाहता है, वह 1 मई तक लिखित में अपने सुझाव एचईआरसी को भेज सकता है।

आयोग ने 14 मई को पंचकूला में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस सुनवाई में उन सभी लोगों को सुना जाएगा जिन्होंने समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इस सुनवाई के माध्यम से आयोग यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों की मांग तर्कसंगत है या नहीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

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