गुरुग्राम: सतत विकास एवं बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही गुरुग्राम बनेगा वर्ल्ड क्लास सिटी
-नारेडको रियल एस्टेट कॉन्क्लेव 2026 के दौरान विशेषज्ञों ने कही यह बात
-विश्वस्तरीय शहर बनने के लिए गुरुग्राम को जल सुरक्षा और वॉकेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर देना होगा जोर
-गुरुग्राम 2.0 के लिए एकीकृत योजना और जल प्रबंधन सबसे बड़ी जरूरत
गुरुग्राम, 19 जून (हि.स.)। गुरुग्राम आज भारत के सबसे प्रमुख कारोबारी और रियल एस्टेट केंद्रों में से एक बन चुका है, जिसकी विश्वस्तरीय स्काईलाइन, वैश्विक कॉरपोरेट उपस्थिति और मजबूत आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र इसकी पहचान हैं। भविष्य के लिए इसे वास्तव में वैश्विक शहर बनाने के लिए अब सतत विकास, जल सुरक्षा, वॉकेबिलिटी, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और एकीकृत बुनियादी ढांचे की योजना पर विशेष ध्यान देना होगा। यह विचार शुक्रवार को यशोभूमि में नारेडको रियल एस्टेट कॉन्क्लेव 2026 के दौरान गुरुग्राम 2.0: द रोड टू अ वल्र्ड क्लास सिटी विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने व्यक्त किए।
इस पैनल चर्चा में नीति-निर्माताओं, शहरी योजनाकारों, वास्तुकारों और रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने गुरुग्राम के अगले विकास चरण की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि गुरुग्राम आर्थिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है, लेकिन दीर्घकालिक सतत विकास के लिए बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करना और नागरिक-केंद्रित विकास मॉडल अपनाना आवश्यक होगा। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय पूर्व सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि चर्चा इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि गुरुग्राम विश्वस्तरीय शहर बन सकता है या नहीं, बल्कि इस बात पर होनी चाहिए कि इसे आने वाली पीढिय़ों के लिए एक स्मार्ट और सतत शहर कैसे बनाया जाए। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के पास पहले से ही विश्वस्तरीय शहर की कई विशेषताएं मौजूद हैं, जिनमें शानदार स्काईलाइन, फॉच्र्यून 500 कंपनियों की उपस्थिति और देश के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट होना शामिल है। उन्होंने कहा कि शहर में पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने विशेष रूप से जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए जल संरक्षण, उपचारित जल के पुन: उपयोग और सतत जल प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर शिक्षा मंत्रालय उपनिदेशक प्रो. डा. रश्मि बी. टंडन ने कहा कि गुरुग्राम का तेज विकास मुख्य रूप से रियल एस्टेट क्षेत्र के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि उल्लेखनीय शहरी विकास के बावजूद शहर आज भी जल उपलब्धता, यातायात और असमान बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार अब सहभागी और नागरिक-केंद्रित शहरी योजना की आवश्यकता है, जिसमें नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और आम नागरिक मिलकर समाधान तैयार करें। उन्होंने विशेष रूप से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और पुराने तथा नए गुरुग्राम के बीच मौजूद अंतर को दूर करने की आवश्यकता बताई और कहा कि भविष्य की योजना आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

