गुरुग्राम: रिश्ते नेटवर्क कमजोर होने से नहीं, संवाद कमजोर होने से दूर होते हैं: इंजीनियर प्रियंका

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गुरुग्राम: रिश्ते नेटवर्क कमजोर होने से नहीं, संवाद कमजोर होने से दूर होते हैं: इंजीनियर प्रियंका


-हम ऑनलाइन ज्यादा और अपनों के साथ कम हो गए हैं

-डिजिटल डिटॉक्स का मतलब तकनीक को छोडऩा नहीं

गुरुग्राम, 16 जून (हि.स.)। आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह की शुरुआत से लेकर रात तक हम स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। सोशल मीडिया, वीडियो और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन के बीच हम दुनिया से तो जुड़े रहते हैं, लेकिन कई बार अपने ही लोगों से दूर हो जाते हैं। यह कहना है चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी मोहाली में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की असिस्टेंट प्रोफेसर इंजीनियर प्रियंका ने कही।

यहां बातचीत में उन्होंने कहा कि हर नोटिफिकेशन पर ध्यान जाता है, लेकिन कई बार अपनों की आवाज अनसुनी रह जाती है। परिवार एक ही घर में होता है, फिर भी बातचीत कम और स्क्रीन टाइम ज्यादा हो गया है। भोजन के समय, छुट्टियों में या खाली समय में भी हमारा ध्यान मोबाइल पर ही रहता है। ऐसे में रिश्तों की गर्माहट और संवाद धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल डिटॉक्स का मतलब तकनीक को छोडऩा नहीं, बल्कि उसके उपयोग में संतुलन लाना है। दिन के कुछ घंटे मोबाइल से दूर रहकर परिवार के साथ समय बिताना, किताब पढऩा, टहलना या दोस्तों से मिलना हमें वास्तविक जीवन के करीब ला सकता है। आखिरकार जीवन की सबसे सुंदर यादें किसी स्क्रीन पर नहीं, बल्कि अपने लोगों के साथ बिताए गए पलों में बनती हैं।

उन्होंने कहा कि मोबाइल की बैटरी जल्दी चार्ज हो जाती है, लेकिन रिश्तों को चार्ज करने के लिए समय और अपनापन चाहिए। आज जरूरत तकनीक से भागने की नहीं, बल्कि उसके साथ संतुलन बनाने की है। यदि हम प्रतिदिन कुछ समय स्क्रीन से दूर रहकर अपने परिवार, मित्रों और स्वयं के साथ बिताएं तो ना केवल रिश्ते मजबूत होंगे बल्कि जीवन भी अधिक संतुलित और सुखद बनेगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल डिटॉक्स एक आदत नहीं, बल्कि एक ऐसा छोटा कदम है, जो हमें आभासी दुनिया से निकालकर वास्तविक खुशियों और मानवीय रिश्तों के करीब ले जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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