गुरुग्राम: राजस्व बढ़ाने के लिए नगर निगम ने की रेवेन्यू रास्तों को बेचने की तैयारी
-कॉमर्शियल जमीनों की होगी नीलामी
गुरुग्राम, 11 मई (हि.स.)। शहर के विकास और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से गुरुग्राम नगर निगम ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। सोमवार को आयोजित सदन की बैठक में निगम ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए, जिनमें कॉमर्शियल जमीनों की नीलामी और विभिन्न सेक्टरों में फंसे पुराने रेवेन्यू रास्तों को निजी बिल्डरों को बेचने की तैयारी प्रमुख रही। निगम का दावा है कि इस योजना से शहर की प्लानिंग बेहतर होगी और निगम के खजाने में बड़ा फंड आएगा।
नगर निगम का सबसे अहम फैसला व्यापार सदन परिसर से जुड़ा है। निगम यहां खाली पड़ी जमीनों की नीलामी करने जा रहा है। प्रस्तावित नीलामी में कॉमर्शियल टावर, एससीओ साइट्स और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट शामिल किए गए हैं। गुरुग्राम में लगातार बढ़ती कॉमर्शियल स्पेस की मांग को देखते हुए इस नीलामी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा और नगर निगम को बड़ी आर्थिक मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा निगम ने शहर के उभरते सेक्टरों के निर्माण में अड़चन बने पुराने राजस्व रास्तों पर भी बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर ली है। सेक्टर-111, 113 और 114 जैसे क्षेत्रों में कई ऐसे रेवेन्यू रास्ते हैं जो सरकारी रिकॉर्ड में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। ये रास्ते कई बड़े बिल्डर प्रोजेक्ट्स के बीच आ रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य और लेआउट प्रभावित हो रहे हैं।
नगर निगम ने इस मामले में मंगलम मल्टीप्लेक्स, नवज्योति डिवेलपर्स और उत्तम बिल्डमार्ट एमथ्एम सहित कई निजी डेवलपर्स के प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल किया है। इन बिल्डरों ने मांग की है कि इन रास्तों की जमीन उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित कीमत पर बेची जाए, ताकि उनके प्रोजेक्ट्स को सुचारु रूप से विकसित किया जा सके। यदि सदन से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इन रास्तों का मालिकाना हक संबंधित बिल्डरों को सौंप दिया जाएगा।
निगम अधिकारियों का कहना है कि रेवेन्यू रास्तों के समायोजन से शहर की प्लानिंग अधिक व्यवस्थित होगी। उनका तर्क है कि कई बड़े प्रोजेक्ट केवल इन पुराने रास्तों की वजह से अधूरे लेआउट में विकसित हो रहे हैं। रास्तों के पुनर्गठन से आधुनिक और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाली कॉलोनियां विकसित की जा सकेंगी।
हालांकि निगम के इस कदम पर सवाल भी उठने लगे हैं। विपक्षी पार्षदों और कुछ सामाजिक संगठनों ने सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से पहले जनता के हित, भविष्य की कनेक्टिविटी और सार्वजनिक उपयोगिता का गहन अध्ययन होना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि बिना योजना के रेवेन्यू रास्ते बेचे गए तो भविष्य में शहर को यातायात और कनेक्टिविटी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अब निगाहें निगम सदन की अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

