‘सप्तशक्ति संगम’ का समापन, मातृशक्ति और पारिवारिक मूल्यों पर जोर

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‘सप्तशक्ति संगम’ का समापन, मातृशक्ति और पारिवारिक मूल्यों पर जोर


नई दिल्ली, 21 फ़रवरी (हि.स.)। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान दिल्ली प्रांत ने शनिवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में ‘सप्तशक्ति संगम’ समापन समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत उपस्थित रहीं। साथ ही भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सह सचिव एवं अध्यक्षा डॉ. ज्योति चौथाईवाले तथा मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रमा शर्मा मौजूद रहीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता उसका कुटुंब होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत वह देश है जहां मातृशक्ति की पूजा की जाती है। कोविड काल में भी महिलाओं ने देशहित में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज सभी क्षेत्रों में सक्षम हैं और बच्चों को बचपन से ही यह संस्कार दिए जाने चाहिए कि वे अपनी माता-बहनों की तरह ही अन्य महिलाओं का भी सम्मान करें।

मुख्य वक्ता डॉ. रमा शर्मा ने महिला सशक्तिकरण को भारतीय दर्शन की मूल दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय चिंतन जीवन को एक अखंड, समन्वित और चेतन इकाई के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि विकास का केंद्र मनुष्य का संतुलित व्यक्तित्व होना चाहिए। यह विकास यात्रा व्यक्ति से आरंभ होकर राष्ट्र तक पहुंचती है। भारत में माता को निर्माता कहा गया है, क्योंकि नारी केवल जन्म देने वाली ही नहीं, बल्कि संस्कारों की निर्माणकर्ता भी होती है। शिशु अपने जीवन के प्रारंभिक संस्कार मां की गोद में ही ग्रहण करता है।

उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ी आपसी सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता देती थी, जबकि आज की पीढ़ी परिवार से दूर होती जा रही है। मानवीय मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि आज घरेलू समस्याएं अदालतों तक पहुंच रही हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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