प्रेमचंद का साहित्य स्वतंत्रता आंदोलन का जीवंत दस्तावेज : करुणाशंकर उपाध्याय
नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। राजधानी कॉलेज में हिन्दी साहित्य परिषद् की ओर से कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार को एकल व्याख्यान एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। ‘प्रेमचंद का प्रदेय’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मुंबई विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्राचार्य प्रो. दर्शन पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत वक्तव्य के साथ किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद हिन्दी के ऐसे रचनाकार हैं, जो साहित्य-प्रेमियों को सदैव अपने आसपास उपस्थित प्रतीत होते हैं। यही निकटता उन्हें निरंतर प्रासंगिक बनाए रखती है। उन्होंने कवि आनंद प्रकाश त्रिपाठी की प्रेमचंद को समर्पित कविता ‘ओ प्रेमचंद’ का पाठ भी किया। प्राचार्य ने कहा कि यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सभी कागजी दस्तावेज नष्ट भी हो जाएँ, तब भी प्रेमचंद का साहित्य उस पूरे इतिहास का जीवंत स्वरूप सुरक्षित रखेगा।
मुख्य वक्ता डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि तुलसीदास के बाद प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक बहुपठित लेखक हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद पर आर्य समाज और गांधीवाद का गहरा प्रभाव था, जिसके कारण उनके साहित्य में आदर्श और यथार्थ का प्रभावी समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के युग को समग्रता में समझने के लिए प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद को साथ पढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
हिन्दी विभाग के प्रभारी प्रो. देव कुमार ने कहा कि प्रेमचंद को आलोचकों की व्याख्याओं से अधिक उनके पात्रों के माध्यम से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जयशंकर प्रसाद का रचनाकर्म जहाँ दर्शन से अनुप्राणित है, वहीं प्रेमचंद का साहित्य समाज के यथार्थ पर आधारित है। हिन्दी साहित्य परिषद् के संयोजक प्रो. महेंद्र सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य अंततः मानवीय संवेदना और प्रेम का संदेश देता है।
इस अवसर पर प्रेमचंद के रचनाकर्म पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें उनके महत्त्वपूर्ण उद्धरणों और विचारों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. सुमन कुमार, प्रो. जसवीर त्यागी, प्रो. नंदकिशोर प्रसाद, प्रो. बंटी कुमार, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. सस्मिता मोहन्ती, डॉ. असित कुमार, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. धीरज कुमार, डॉ. बलराम मीना, डॉ. त्रिपुरेश गोंड, डॉ. गौरव त्रिपाठी, डॉ. अमित, डॉ. अंकित अभिषेक, डॉ. श्रुति, डॉ. अविनाश सिंह, डॉ. विकास तिवारी तथा शुभम सिंह उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

