दिल्ली में जलभराव को लेकर सरकार पर बरसे अंकुश नारंग, कहा निगम में सरकार  होने के बावजूद बारिश में डूब रही राजधानी

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दिल्ली में जलभराव को लेकर सरकार पर बरसे अंकुश नारंग, कहा निगम में सरकार  होने के बावजूद बारिश में डूब रही राजधानी


दिल्ली में जलभराव को लेकर सरकार पर बरसे अंकुश नारंग, कहा निगम में सरकार  होने के बावजूद बारिश में डूब रही राजधानी


नई दिल्ली, 08 जुलाई (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) के वरिष्ठ नेता और नगर निगम (एमसीडी) में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने दिल्ली में मानसून की पहली बारिश के बाद कई इलाकों में हुए जलभराव को लेकर दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावे जमीन पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।

अंकुश नारंग ने बुधवार को कहा कि सरकार दावा कर रही थी कि 90 प्रतिशत नालों की सफाई पूरी कर ली गई है, लेकिन कुछ ही मिनटों की बारिश में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में जलभराव हो गया। यदि नालों की सफाई हो चुकी थी तो राजधानी की सड़कों और गलियों में पानी क्यों भर गया।

उन्होंने कहा कि इस मानसून में अब तक हुई तीन बारिशों में ही दिल्ली का बुरा हाल हो चुका है। पहली बारिश में लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल जलमग्न हो गया था, जबकि 6 और 7 जुलाई की बारिश के बाद राजधानी के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। संगम विहार समेत अनेक क्षेत्रों से जलभराव की शिकायतें सामने आई हैं।

नारंग ने कहा कि दिल्ली सरकार और एमसीडी दोनों का नियंत्रण है, इसके बावजूद न तो लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के नालों की सफाई हुई और न ही एमसीडी के नालों की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता से जलभराव मुक्त दिल्ली का वादा किया था, लेकिन अब उसके दावे बारिश में बह गए हैं।

आआपा नेता ने कहा कि राजधानी की जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दिल्लीवासी को झूठे सपने दिखाए और आज हालात यह हैं कि राजधानी की सड़कों और गलियों में लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ रहा है।

अंकुश नारंग ने एमसीडी के महापौर और निगमयुक्त को पत्र लिखकर पूरे शहर में जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि मानसून की पहली ही बारिश में लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल तक जलमग्न हो जाना तथा हाल की बारिश में राजधानी के कई हिस्सों का डूब जाना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को घरों से निकलते समय सड़क के बजाय जलाशय जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

पत्र में उन्होंने कहा कि यदि 90 प्रतिशत नालों की सफाई का दावा सही है तो फिर दो दिन की बारिश में दिल्ली में व्यापक जलभराव क्यों हुआ। उन्होंने नालों की सफाई के दावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।

नारंग ने राजेंद्र नगर में पिछले वर्ष जलभराव और करंट लगने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में खुले बिजली तार, क्षतिग्रस्त खंभे और अपर्याप्त निगरानी व्यवस्था किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।

उन्होंने कहा कि जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि अस्पतालों, बाजारों, मुख्य मार्गों और आवासीय क्षेत्रों में पानी भर रहा है तो यह प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलता है।

अंकुश नारंग ने एमसीडी से मांग की है कि जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की तत्काल पहचान कर 24 घंटे के भीतर जल निकासी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अस्पतालों, स्कूलों, कॉलोनियों और प्रमुख मार्गों के लिए विशेष आपात जल निकासी व्यवस्था की जाए। उन्होंने बिजली विभाग के साथ संयुक्त सुरक्षा निरीक्षण, नालों की सफाई का जोनवार आंकड़ा सार्वजनिक करने, जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा प्रभावित नागरिकों के लिए हेल्पलाइन और राहत व्यवस्था सक्रिय करने की भी मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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