विवेक विहार अग्निकांड: बंद छत, लोहे की ग्रिल और धुएं के बीच बुझ गई नौ जिंदगियां

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विवेक विहार अग्निकांड: बंद छत, लोहे की ग्रिल और धुएं के बीच बुझ गई नौ जिंदगियां


नई दिल्ली, 03 मई (हि.स.)। दिल्ली के विवेक विहार में रविवार तड़के जो हुआ, उसने राजधानी को भीतर तक हिला दिया। रात की खामोशी में अचानक उठी चीखें, धुएं से भरी सीढ़ियां, खिड़कियों से मदद के लिए पुकारते लोग और कुछ ही मिनटों में आग की लपटों में बदलती चार मंजिला इमारत यह मंजर इतना भयावह था कि जिसने भी देखा, सिहर उठा। इस अग्निकांड में डेढ़ साल के मासूम समेत नौ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

पुलिस अधिकारी के अनुसार हादसा सुबह करीब 3:47 बजे हुआ, जब विवेक विहार फेस-1 स्थित बी-13 नंबर की चार मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर लगे एसी में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद धमाका हुआ और आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में लपटों ने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद 14 फायर टेंडर और दिल्ली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। यह बिल्डिंग बाहर से जितनी सामान्य दिख रही थी, अंदर उतनी ही खतरनाक साबित हुई। कुल आठ फ्लैटों वाली इस इमारत में हर मंजिल पर दो फ्लैट थे, लेकिन बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक संकरी सीढ़ी और एक लिफ्ट थी। आग लगते ही बिजली गुल हो गई और लिफ्ट बंद पड़ गई। धुआं और लपटें सीढ़ियों में भर गईं, जिससे लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया। कई फ्लैटों में लगी लोहे की ग्रिल मौत का फंदा बन गई। लोग चाहकर भी खिड़की या बालकनी से बाहर नहीं निकल सके। सबसे भयावह स्थिति तब बनी जब जान बचाने के लिए कई लोग छत की ओर भागे, लेकिन वहां पहुंचकर पता चला कि छत का दरवाजा बंद है। यह बंद दरवाजा उन लोगों के लिए मौत की दीवार साबित हुआ, जो ऊपर जाकर अपनी जान बचाना चाहते थे। बाद में दमकलकर्मियों को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास से तीन शव मिले, जो इसी बंद दरवाजे के पास पड़े थे।

दमकल विभाग के अनुसार, एक शव पहली मंजिल से, पांच शव दूसरी मंजिल से और तीन शव तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास से बरामद किए गए। मृतकों में दो महिलाएं, एक बच्चा और छह पुरुष शामिल हैं। हादसे में जिन लोगों की जान गई। उनमें दूसरी मंजिल पर रहने वाले अरविंद जैन, उनकी पत्नी अनीता जैन, पुत्र निशांत जैन, बहू अंचल जैन और मासूम आकाश जैन शामिल हैं। पहली मंजिल की निवासी शिखा जैन भी आग की चपेट में आकर दम तोड़ गईं। वहीं तीसरी मंजिल पर रहने वाले नितिन जैन, उनकी पत्नी शैले जैन और पुत्र सम्यक जैन की भी इस हादसे में मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक अरविंद जैन पेशे से फाइनेंसर थे, उनकी पत्नी गृहिणी थीं और बेटा निशांत जैन कंपनी सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत था। एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।

इस त्रासदी के बीच कुछ ऐसे पल भी सामने आए, जो इंसानियत और बहादुरी की मिसाल बन गए। इमारत के अपर ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले मयंक जैन ने बताया कि आग सबसे पहले दूसरी मंजिल पर लगी। “करीब 3:15 बजे निशांत जैन आग के बीच से भागते हुए हमारे दरवाजे तक पहुंचे। उन्होंने जोर-जोर से बेल बजाई और दरवाजा पीटकर हमें जगाया। अगर वह हमें नहीं जगाते तो शायद हम भी नहीं बचते।”

मयंक ने बताया कि परिवार के नीचे आते ही सभी लोग मिलकर ऊपर फंसे लोगों को बचाने में जुट गए। “हमने नीचे गद्दे बिछाए और ऊपर से कूद रही दो बच्चियों को पकड़कर उनकी जान बचाई। पुलिस, दमकल और स्थानीय लोगों ने मिलकर 15 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला।”

मंयक के उनके अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि दूसरी मंजिल से शुरू होकर कुछ ही देर में चौथी मंजिल तक पहुंच गई। हालांकि अपर ग्राउंड फ्लोर तक आग नहीं पहुंची, जिससे वहां रहने वाले लोगों की जान बच गई। दमकल कर्मियों को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई फ्लैटों की ग्रिल काटनी पड़ी। धुएं और गर्मी के कारण अंदर जाना बेहद मुश्किल था, लेकिन टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और लोगों को बाहर निकाला। कई घायल अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

अब इस हादसे के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या इमारत में पर्याप्त फायर सेफ्टी इंतजाम थे? क्या बिल्डिंग निर्माण नियमों का पालन किया गया था? अगर छत का दरवाजा खुला होता, तो क्या कई जानें बच सकती थीं? क्या लोहे की ग्रिल लगाना सुरक्षा नहीं, बल्कि मौत का कारण बन गया?

प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दमकल विभाग, नगर निगम और पुलिस संयुक्त रूप से यह पता लगा रहे हैं कि बिल्डिंग में अग्निशमन के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं, और निर्माण के दौरान किसी नियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ। वहीं जांच और जवाबदेही से इतर, विवेक विहार की गलियों में मातम पसरा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

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