विजेंद्र गुप्ता ने विधान सभा जैसे संस्थानों को सीखने, संवाद और सहभागिता के खुले मंच के रूप में विकसित करने पर दिया जोर

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विजेंद्र गुप्ता ने विधान सभा जैसे संस्थानों को सीखने, संवाद और सहभागिता के खुले मंच के रूप में विकसित करने पर दिया जोर


नई दिल्ली, 08 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा का बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के भारती कॉलेज के विद्यार्थियों ने भ्रमण किया। इस दौरान दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि हमारे युवा अपने संस्थानों, संविधान एवं उसमें अपनी भूमिका को कितनी गहराई से समझते हैं, इसी बात पर देश का भविष्य निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य जागरूकता पैदा करने के साथ ही सक्रिय भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने विधान सभा जैसे संस्थानों को सीखने, संवाद और सहभागिता के खुले मंच के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

विधानसभा भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को सदन के इतिहास, विकास और भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में उसकी भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत वीर विठ्ठलभाई पटेल के जीवन एवं योगदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिससे विद्यार्थियों को भारत की संसदीय परंपरा में उनके योगदान की गहन समझ प्राप्त हुई।

इसके साथ ही ‘विठ्ठलभाई पटेल: शताब्दी यात्रा’ शीर्षक से कॉफी टेबल बुक भी कॉलेज को भेंट की गई, जो उनकी विरासत के सौ वर्षों को चिह्नित करती है। विधानसभा अध्यक्ष ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उनके प्रश्नों का उत्तर दिया और उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक एवं सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम विधान सभाओं जैसे मंचों से गहराई से जुड़ा रहा है, जहां शासन, अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में स्पीकर के निर्वाचन और प्रतिनिधित्व के विस्तार ने लोकतांत्रिक भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाया।

विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि गोपाल कृष्ण गोखले, विठ्ठलभाई पटेल, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी बल्कि संसदीय परंपराओं को भी सशक्त बनाया।

गुप्ता ने मार्च 1919 में इसी सदन में पारित रॉलेट एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने देशभर में जनाक्रोश को और तीव्र किया। इसके पश्चात हुई घटनाएं, विशेषकर जलियांवाला बाग त्रासदी, औपनिवेशिक दमन की गंभीरता और जनता के सशक्त प्रतिरोध का प्रतीक थीं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं पर विधान मंचों में हुई बहसों ने उन्हें राष्ट्रीय जागरण और जन-सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में स्थापित किया।

समकालीन शिक्षा सुधारों का उल्लेख करते विजेंद्र गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को एक दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नीति रटने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर बहु-विषयक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ गहन जुड़ाव को प्रोत्साहित करती है, जिससे विद्यार्थी जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित हो सकें।

विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की समृद्ध विरासत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दूरदर्शी सोच के मार्गदर्शन में भारत के युवा देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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