विजेंद्र गुप्ता ने आधुनिक जीवन में आत्मचिंतन की जरूरत पर दिया बल

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विजेंद्र गुप्ता ने आधुनिक जीवन में आत्मचिंतन की जरूरत पर दिया बल


नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र समय को केवल क्षणों के अनुक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक सार्थक निरंतरता के रूप में समझने का एक सभ्यतागत प्रयास है। उन्होंने यह विचार शनिवार को 'एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव - एस्ट्रो कॉन्क्लेव 2026' में सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में विजेंद्र गुप्ता ने आधुनिक जीवन में आत्मचिंतन की गहरी आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां संवाद की गति बहुत तीव्र है, वहां धैर्यपूर्ण जांच और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने वाले मंच सामाजिक सद्भाव और दिशा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि भारत की सभ्यतागत यात्रा हमेशा तर्क और अंतर्ज्ञान के अनूठे समन्वय से परिभाषित रही है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष, अपने शास्त्रीय अर्थ में, केवल एक अभ्यास नहीं है बल्कि समय को एक सार्थक निरंतरता के रूप में समझने का एक दार्शनिक प्रयास है।

गुप्ता ने कहा कि ज्ञान की ऐसी प्रणालियां मानव अस्तित्व और ब्रह्मांड के बीच अंतर्संबंध के गहरे विश्वास को दर्शाती हैं, जो प्रतिबिंब और विनम्रता की भावना पैदा करती हैं, जो 21वीं सदी में भी अत्यंत प्रासंगिक है।

भारतीय विरासत के वैश्विक प्रभाव पर जोर देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने पारंपरिक ज्ञान को भारत की 'सॉफ्ट पावर' के एक स्तंभ के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि जब दर्शन, कला और प्राचीन विज्ञान सहित भारत की बौद्धिक परंपराओं को प्रामाणिकता और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो वे अंतरराष्ट्रीय संवाद के लिए शक्तिशाली सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आधुनिक प्रगति और प्राचीन ज्ञान के बीच संतुलन खोजने के लिए भारत की जड़ों की ओर देख रही है।

विजेंद्र गुप्ता ने संस्कृति और जिम्मेदार नेतृत्व के बीच आवश्यक कड़ी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगीत, विद्वत्ता और कविता जैसी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि एक सूचित और सुदृढ़ समाज के निर्माण की नींव हैं। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, ये परंपराएं अनुशासन और संवेदनशीलता विकसित करती हैं जो सार्थक सार्वजनिक विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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