वाल्मीकि जयंती पर 'राष्ट्र साधना के सौ वर्ष' काव्य गोष्ठी में गूंजे राष्ट्रभक्ति के स्वर

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वाल्मीकि जयंती पर 'राष्ट्र साधना के सौ वर्ष' काव्य गोष्ठी में गूंजे राष्ट्रभक्ति के स्वर


वाल्मीकि जयंती पर 'राष्ट्र साधना के सौ वर्ष' काव्य गोष्ठी में गूंजे राष्ट्रभक्ति के स्वर


नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। आदिकवि महार्षि वाल्मीकि जयंती एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती, दिल्ली के नैऋत्य केंद्र के भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज में ‘राष्ट्र साधना के सौ वर्ष’ काव्य गोष्ठी का आयोजन किया।

इस अवसर पर कवियों ने अपनी रचनाओं से वाल्मीकि का स्मरण कर संघ की सौ वर्षों की यात्रा के विविध आयामों को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी।

गोष्ठी में राष्ट्रीय संघ की सौ वर्षों की यात्रा से जुड़े विविध विषयों पर कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इनमें संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी, हिंदू संगठन, दैनिक शाखा के संस्कार केंद्र के रूप में महत्त्व, भगवा ध्वज को गुरु मानने की परंपरा, पथ संचलन, प्रचारकों का समर्पित जीवन, प्रशिक्षण वर्ग का आनंद, विभाजन की विभीषिका के समय किए गए राहत कार्य, प्राकृतिक आपदाओं में सेवा कार्य, आपातकाल की संघर्ष गाथा, विविध संगठनों की भूमिका, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, गौ सेवा, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक अनुशासन तथा स्वबोध जैसे विषय प्रमुख रहे।

इस अवसर पर दिल्ली राज्य के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्यकारों के पूर्वज हैं, जिनकी अमर कृति रामायण भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उनकी रचनाएं करुणा, संवेदना और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देती हैं।

संघ के सौ वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह जागरण, संगठन, संस्कार और समाज निर्माण के प्रति असंख्य स्वयंसेवकों द्वारा किया गया कार्य है। उन्होंने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की छह दशकों की यात्रा को भी महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि परिषद भारतीय भाषाओं और साहित्य के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। युवाओं को साहित्य से जुड़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य केवल किसी एक विषय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक हमारे साथ रहता है। साहित्य समाज को जोड़ने, का सशक्त माध्यम है।

द्वारका नगर के संघचालक प्रदीप देसवाल ने संघ स्थापना के पृष्ठभूमि पर अपनी कविता प्रस्तुत की।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

Livevns.news Desk
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