इमर्सिव म्यूजियम के रूप में विकसित होगा चांदनी चौक का टाउन हॉल
- एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष ने टाउन हॉल के संरक्षण और पुनर्विकास के प्रस्ताव को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने टाउन हॉल, चांदनी चौक के संरक्षण और पुनर्विकास से जुड़े विस्तृत प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 160 साल पुराने भवन को आधुनिक इमर्सिव म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।
अध्यक्ष ने बताया कि एमसीडी के स्वामित्व वाला यह लगभग 160 वर्ष पुराना भवन वर्ष 1861-66 के बीच ‘दिल्ली इंस्टीट्यूट’ के रूप में निर्मित हुआ था, जिसे 1866 में नगर निगम मुख्यालय में परिवर्तित किया गया। वर्ष 1935-39 के दौरान इसका विस्तार कर इसे दो मंजिला स्वरूप दिया गया। वर्ष 2012 तक यह निगम मुख्यालय के रूप में उपयोग में रहा, जिसके बाद से यह काफी हद तक अनुपयोगी पड़ा है।
उन्होंने कहा कि यह भवन दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित ग्रेड-1 हेरिटेज संरचना है, इसलिए इसका पुनर्विकास हेरिटेज मानकों और वैज्ञानिक तरीकों के अनुरूप किया जाएगा, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रहे।
एमसीडी आयुक्त द्वारा 11 फरवरी को साइट निरीक्षण के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके तहत दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) ने “टाउन हॉल इमर्सिव म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर” का कॉन्सेप्ट प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे 2 मार्च की बैठक में विस्तार से चर्चा के बाद आगे बढ़ाया गया।
प्रस्ताव के अनुसार, टाउन हॉल को एक आधुनिक इमर्सिव म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें शाहजहानाबाद और भवन के इतिहास को इंटरएक्टिव गैलरी, डिजिटल तकनीक और मल्टीलिंगुअल सेवाओं के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा शैक्षणिक कार्यक्रम, हेरिटेज वॉक, सांस्कृतिक आयोजन और फूड एवं रिटेल सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
परियोजना को “डेवलप-ऑपरेट-मेंटेन” मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिसमें एमसीडी पर कोई पूंजीगत व्यय नहीं आएगा, जबकि स्वामित्व उसके पास ही रहेगा। इसके लिए एमसीडी, डीटीटीडीसी और निजी भागीदार के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया जाएगा।
अध्यक्ष के अनुसार, परियोजना चार चरणों में लगभग 36 महीनों में पूरी की जाएगी, जिसमें संरचनात्मक आकलन, संरक्षण कार्य, म्यूजियम विकास और अंततः सार्वजनिक उद्घाटन शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), वित्तीय व्यवहार्यता और राजस्व मॉडल को अंतिम रूप देने का कार्य डीटीटीडीसी को सौंपा गया है। यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि चांदनी चौक क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

