सत्य निकेतन हादसे की जगह जैमर लगाने पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

WhatsApp Channel Join Now
सत्य निकेतन हादसे की जगह जैमर लगाने पर सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल


नई दिल्ली, 08 सितंबर (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के घटनास्थल पर मोबाइल जैमर लगाए जाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जैमर लगाए जाने से हादसे में फंसे लोगों और मौके पर मौजूद लोगों के लिए मदद के लिए फोन करना मुश्किल हो गया।

सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सत्य निकेतन में पीजी छात्रों की इमारत के पास मोबाइल सिग्नल जाम करने का आदेश किसने दिया, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमारत ढहने जैसी घटनाओं में मलबे में फंसे लोग अक्सर मोबाइल फोन के जरिए अपने परिजनों या राहत एजेंसियों से संपर्क कर मदद मांगते हैं।

आआपा नेता ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर जैमर लगाए जाने के कारण स्थानीय लोग एंबुलेंस या अन्य सहायता के लिए फोन नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि यदि मलबे में कोई व्यक्ति फंसा था और मोबाइल सिग्नल उपलब्ध नहीं था, तो उसकी स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से राहत एवं बचाव कार्य में कथित देरी को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में दो से तीन घंटे क्यों लगे और सरकारी एंबुलेंस भी कथित तौर पर करीब दो घंटे की देरी से क्यों पहुंची।

उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद सबसे पहले ब्लिंकिट की एक निजी एंबुलेंस मौके पर पहुंची, जबकि प्रशासन की एंबुलेंस करीब दो घंटे बाद पहुंची। उन्होंने राहत और बचाव कार्य शुरू होने में भी दो से ढाई घंटे की देरी का आरोप लगाया।

आआपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह घटना दिल्ली के मध्य क्षेत्र में हुई है और इसके बावजूद राहत एवं बचाव दल को पहुंचने में इतना समय लगना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि करीब 100 गज की इमारत के मलबे को हटाने में 24 घंटे से अधिक का समय लगा।

सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों से इस मामले को उठाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर यदि आपदा के दौरान राहत एजेंसियों की पहुंच और संचार व्यवस्था ऐसी स्थिति में हो, तो सरकार के विकास संबंधी दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

Share this story