संत गाडगे महाराज की जयंती पर भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
नई दिल्ली, 23 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली सचिवालय में सोमवार को संत गाडगे महाराज की जयंती के अवसर पर भजन-कीर्तन एवं विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके जीवन, विचारों और समाज सुधार के लिए किए गए कार्यों पर आधारित भावपूर्ण भजनों और नाट्य मंचन ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत संत गाडगे महाराज के जीवन पर आधारित भजनों से हुई, जिनमें स्वच्छता, शिक्षा, समानता और अंधविश्वास के विरुद्ध उनके संघर्ष को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने कीर्तन के माध्यम से दर्शाया कि किस प्रकार वे गांव-गांव जाकर लोगों को निर्जीव जानवरों की बलि न देने, गंदगी से दूर रहने और समाज में समरसता स्थापित करने का संदेश देते थे। मंचन में यह भी प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया कि हैजा जैसी बीमारियों को स्वच्छता से रोका जा सकता है तथा किस प्रकार उनकी स्वच्छता की अलख एक व्यापक जनजागरण में परिवर्तित हुई।
भजनों में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि “मनुष्य जीवन ईश्वर का वरदान है” और इसे स्वच्छ, सदाचारी एवं शिक्षित बनाकर ही सार्थक किया जा सकता है। शिक्षा को समाज के अंधकार को दूर करने वाला दीपक बताते हुए कलाकारों ने संत गाडगे महाराज जी के उस विचार को दोहराया कि ऊंच-नीच और भेदभाव से मुक्त समाज ही सच्ची मानवता का प्रतीक है।
इस अवसर पर दिल्ली के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि जो 70 वर्षों में कभी नहीं हुआ, वह संत की चेतना ने आज कर दिखाया। यह हमारे लिए सौभाग्य है कि जिन संतों ने मानवता के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया, उनकी जयंती आज हम दिल्ली सचिवालय में मना रहे हैं। संतों ने कभी जाति या भेदभाव की बात नहीं की। संतों ने सदा मानवता, शिक्षा और समानता की बात की। संत गाडगे महाराज जी, जो धोबी समाज से जुड़े हुए थे, ने 1876 में ही स्वच्छता और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
मंत्री इंद्राज ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि हाल ही में संत रविदास जी की जयंती भी दिल्ली सचिवालय में भव्य रूप से मनाई गई थी। उन्होंने कहा कि संतों ने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया है, तोड़ने का नहीं।
कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि महामारी के समय हमें फिर समझ आया कि स्वच्छता, स्वस्थ जीवनशैली और पारंपरिक मूल्यों का कितना महत्व है। संत गाडगे महाराज जी भी यही सिखाते थे कि स्वच्छता ही सच्ची सेवा है।
उन्होंने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि मैं आप सभी से निवेदन करता हूं—नींव का पत्थर बनिए। जहां भी रहें, सप्ताह में एक बार स्वच्छता अभियान अवश्य चलाइए। केवल मंच सजाने से परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि आपके प्रयास और परिश्रम से ही समाज बदलेगा। आप 200 लोग नहीं, बल्कि 20,000 लोगों की चेतना का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

