संस्कृत सप्ताह पर दिल्ली में निकलेगी संस्कृत-शोभायात्रा, 23 अगस्त को होगा आयोजन

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संस्कृत सप्ताह पर दिल्ली में निकलेगी संस्कृत-शोभायात्रा, 23 अगस्त को होगा आयोजन


नई दिल्ली, 21 अगस्त (हि.स.)। संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से संस्कृतभारती, दिल्ली प्रान्त की ओर से संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में 23 अगस्त (रविवार) को संस्कृत-शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। शोभायात्रा दोपहर 3 बजे संस्कृतभारती के केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ से प्रारम्भ होकर राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 6 तक पहुंचेंगे।

इसके बाद सामूहिक संस्कृत उद्घोष के साथ राजीव चौक के पूरे सर्कल का भ्रमण किया जाएगा। भ्रमण के उपरांत गेट नंबर 6 से शोभायात्रा पुनः वाहनों द्वारा संस्कृतभारती के केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ लौटेगी। आयोजन के माध्यम से “मातृभूमिः भारतम्, मातृभाषा संस्कृतम्” के भाव को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

संस्कृत भारती ने शोभायात्रा में संस्कृतप्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, युवाओं, अभिभावकों तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिकों की भागीदारी की अपेक्षा की। आयोजन का उद्देश्य संस्कृत को शास्त्रीय ग्रंथों और शैक्षणिक अध्ययन तक सीमित भाषा के रुप में देखने से ज्यादा उसे जन-संवाद और दैनिक व्यवहार की जीवंत भाषा के रूप में समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

आयोजकों के अनुसार, संस्कृत-शोभायात्रा केवल एक सामान्य यात्रा न होकर भाषा और संस्कृति के प्रति जन-जागरण का माध्यम होगी। सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाली इस शोभायात्रा के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी अध्ययन, संवाद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की समर्थ भाषा है।

यात्रा के दौरान संस्कृत में सामूहिक उद्घोष के साथ संस्कृत भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति तथा ज्ञान-परम्परा के संरक्षण और संवर्धन का संदेश जनसामान्य तक पहुंचाया जाएगा।

संस्कृतभारती, दिल्ली प्रान्त ने संस्कृतप्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, युवाओं तथा दिल्ली के नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में शोभायात्रा में सहभागी बनने की अपील की।

उल्लेखनीय है कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत संस्कृतभारती वर्ष 1981 से देश-विदेश में विभिन्न गतिविधियों का संचालन कर रही है। संस्था संस्कृत-सम्भाषण शिविर, पत्राचार पाठ्यक्रम, गीता-शिक्षण केन्द्र, बालकेन्द्र और संवादशाला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को सरल पद्धति से संस्कृत सीखने और बोलने के लिए प्रोत्साहित करती है।

राजधानी दिल्ली में भी संस्कृतभारती की ओर से संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार व्यापक अभियान चलाए जाते रहे हैं। वर्ष 2025 में दिल्ली में 1008 संस्कृत-सम्भाषण शिविरों का आयोजन किया गया था। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक संस्थानों में आयोजित इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को सरल और सहज पद्धति से संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण देना था।

संस्कृतभारती का मानना है कि संस्कृत भारत की समृद्ध साहित्यिक और ज्ञान-परम्परा की महत्वपूर्ण वाहक है। भारतीय दर्शन, साहित्य, योग, आयुर्वेद, व्याकरण, गणित, नाट्य और अन्य अनेक ज्ञान-विधाओं की विशाल परम्परा संस्कृत से जुड़ी हुई है।

आयोजन के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने तथा उन्हें भारतीय ज्ञान-विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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