आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बनी घर के सपने को हकीकत में बदलने का मजबूत सहारा

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आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए बनी घर के सपने को हकीकत में बदलने का मजबूत सहारा


रायगढ़, 29 अगस्त (हि.स.)।अपना घर होना हर व्यक्ति के जीवन का एक बड़ा सपना होता है। मेहनत-मजदूरी कर जीवन चलाने वाले परिवारों के लिए पक्का मकान बनाना आसान नहीं होता। रोज की कमाई से परिवार की जरूरतें पूरी करना ही चुनौती हो, तो घर बनाने के लिए बचत कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में शासन की आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए सुरक्षित और पक्के आशियाने की उम्मीद को हकीकत में बदलने का माध्यम बन रही है। तमनार विकासखंड के ग्राम पंचायत महलोई की रहने वाली दूरपति राठिया भी ऐसे ही संघर्षपूर्ण जीवन से गुजरी हैं।

विधवा एवं एकल महिला दूरपति मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करती हैं। सीमित आमदनी में रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही उनके लिए चुनौती थी। पक्का मकान बनाना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर था। लंबे समय तक वह कच्चे मिट्टी के मकान में रहती थीं। बरसात का मौसम उनके लिए सबसे अधिक परेशानी लेकर आता था। बारिश में छत से पानी टपकता और घर के भीतर नमी व गंदगी फैल जाती थी। कच्ची दीवारों के कमजोर होने से गिरने का डर बना रहता था। ऐसे हालात में सुरक्षित छत की कमी हर समय महसूस होती थी। इन परिस्थितियों के बीच दूरपति मेहनत-मजदूरी करते हुए अपने पक्के घर की आस लगाए रहीं। उनका मानना था कि यदि कभी पक्का मकान मिल जाए तो बारिश और मौसम की परेशानियों से काफी राहत मिलेगी तथा वह सुरक्षित माहौल में अपना जीवन गुजार सकेंगी।

दूरपति की यह उम्मीद प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से पूरी हुई। योजना के अंतर्गत उनका आवास स्वीकृत हुआ और निर्माण के लिए शासन से सहायता राशि प्राप्त हुई। इसके बाद उनके पक्के घर के निर्माण का रास्ता खुला और आखिरकार उनका वर्षों पुराना इंतजार खत्म हुआ। आज दूरपति अपने नए पक्के प्रधानमंत्री आवास में सुरक्षित जीवन बिता रही हैं। पक्के घर ने उनके जीवन में स्थायित्व के साथ आत्मविश्वास और सुकून भी बढ़ाया है। नए घर के सामने खड़ी दूरपति के चेहरे की खुशी उनके जीवन में आए इस बदलाव को साफ बयां करती है।

दूरपति राठिया ने पक्का आवास मिलने पर शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि अपने पक्के घर में रहना उनके लिए बेहद खुशी और सुकून का अनुभव है।

हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान

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