सीबीएसई के ओएसएम मूल्यांकन सिस्टम के खिलाफ एनएसयूआई ने की उच्च न्यायालय से री-इवैल्यूएशन दोबारा शुरू करने की मांग

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सीबीएसई के ओएसएम मूल्यांकन सिस्टम के खिलाफ एनएसयूआई ने की उच्च न्यायालय से री-इवैल्यूएशन दोबारा शुरू करने की मांग


नई दिल्ली, 02 जून (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में लागू किए गए नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंची। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में दायर याचिका में मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक खामियों पर गंभीर सवाल उठाए गए।

दायर याचिका में कहा गया है कि देशभर के छात्रों से प्राप्त शिकायतों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में त्रुटियां, उत्तर पुस्तिकाओं का मिसमैच होना, पोर्टल की तकनीकी खराबियां, मूल्यांकन में गड़बड़ियां, बार-बार पोर्टल फेल होना और फिजिकल वेरिफिकेशन की उचित व्यवस्था का अभाव जैसी समस्याएं शामिल हैं।

एनएसयूआई ने कहा कि परीक्षा प्राधिकरण की तकनीकी एवं प्रशासनिक विफलताओं का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए। संगठन ने अदालत को बताया कि यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। कक्षा 12वीं के परिणामों के बाद 1.29 लाख से अधिक छात्रों ने वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है, जबकि लगभग 1.11 लाख छात्रों को परीक्षा में असफल घोषित किया गया है।

याचिका में एनएसयूआई ने मांग की है कि प्रभावित छात्रों के लिए वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को एक महीने के लिए दोबारा खोला जाए। साथ ही जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब, धुंधली, मिसमैच या गलत तरीके से मूल्यांकित पाई जाएं, उन्हें उचित राहत और अतिरिक्त अंक दिए जाएं।

साथ ही संगठन ने उन मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की मैनुअल री-चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की मांग की, जहां छात्र स्कैन की गई कॉपी या मूल्यांकन पर आपत्ति जता रहे हैं। याचिका में ओएसएम सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खामियों, प्रशासनिक अनियमितताओं और शिकायत निवारण प्रणाली की विफलताओं की स्वतंत्र जांच की भी मांग की गई है।

एनएसयूआई ने अदालत के समक्ष कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम छात्रों के विश्वविद्यालय प्रवेश, छात्रवृत्ति, करियर और भविष्य से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है ताकि छात्रों और अभिभावकों का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

यह याचिका अधिवक्ता ऋषव रंजन, अजय छिकारा, उमर होडा और ईशा बख्शी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई है। मामले की सुनवाई पर अब छात्रों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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