नॉर्दर्न रिज की 277.56 एकड़ जमीन अब आरक्षित वन

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नॉर्दर्न रिज की 277.56 एकड़ जमीन अब आरक्षित वन


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने नॉर्दर्न रिज की 112.328 हेक्टेयर (277.56 एकड़) जमीन को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत 'आरक्षित वन' घोषित करने के लिए पहले चरण की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। यह क्षेत्र अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और दिल्ली के महत्वपूर्ण हरित एवं पारिस्थितिक क्षेत्र के रूप में कार्य करता है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि नॉर्दर्न रिज दिल्ली की अमूल्य प्राकृतिक विरासत है और इसका संरक्षण शहर के पर्यावरणीय स्वास्थ्य के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 112.328 हेक्टेयर भूमि को आरक्षित वन घोषित करने के लिए फेज-I नोटिफिकेशन को मंजूरी देना दिल्ली के हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखने और राजधानी को अधिक स्वस्थ, हरित और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति मजबूत बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नॉर्दर्न रिज दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ और पारिस्थितिक केंद्र की भूमिका निभाता है। इसे आरक्षित वन का कानूनी संरक्षण मिलने से इसके दीर्घकालिक संरक्षण का आधार और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली में वन क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में वर्तमान सरकार ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। पिछली सरकारों के दौरान मात्र 96.16 हेक्टेयर (237.611 एकड़) भूमि को आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 5,267.009 हेक्टेयर (13,014.77 एकड़) क्षेत्र को अधिसूचित किया जा चुका है। अब नॉर्दर्न रिज की 112.328 हेक्टेयर भूमि अधिसूचित होने के बाद कुल क्षेत्र 5,363.169 हेक्टेयर यानी लगभग 13,252.390 एकड़ हो जाएगा। इसी व्यापक संरक्षण अभियान की कड़ी में दिल्ली सरकार ने पिछले माह भी दक्षिणी रिज की करीब 1,000 एकड़ (400 हेक्टेयर) अतिरिक्त भूमि को भी आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित करने की स्वीकृति दी थी। इससे दिल्ली के रिज क्षेत्रों और प्राकृतिक हरित विरासत को संरक्षित करने के सरकार के प्रयासों को और मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को स्वच्छ, हरित और स्वस्थ बनाने की लड़ाई केवल प्रदूषण के तत्काल प्रभावों को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए शहर की प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि नॉर्दर्न रिज जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों का संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना दिल्ली को वायु प्रदूषण तथा जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने में दीर्घकालिक मजबूती देगा। उनकी सरकार दिल्ली की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के साथ-साथ प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को भी लगातार मजबूत कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिशा में इस वर्ष दिल्ली में 73 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। पौधे लगाए जाने की यह प्रक्रिया अब भी जारी है। इसके अलावा ‘एक पेड़ मां के नाम’ नागरिक अभियान और ‘वृक्ष रथ’ पहल के माध्यम से लोगों को अपने घरों और आसपास पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित किया गया है। रिज क्षेत्रों में भूजल रिचार्ज को बेहतर बनाने के लिए चेक-डैम निर्माण और प्राकृतिक पुनर्जीवन के कार्य भी किए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को जलवायु एवं जैव विविधता के प्रति जागरूक करने के लिए ‘इको-वॉरियर्स’ के रूप में भी जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉर्दर्न रिज के संरक्षण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अगले चरण में क्षेत्र के सीमांकन, पर्यावास प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े उपाय किए जाएंगे। इससे नॉर्दर्न रिज के संरक्षण को और मजबूत करने के साथ-साथ दिल्ली के हरित फेफड़ों और पारिस्थितिक केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को भी सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली की हरियाली और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण सरकार की सतत प्राथमिकता है। हरित क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन राजधानी के टिकाऊ भविष्य की आधारशिला हैं और सरकार इनके संरक्षण के लिए निरंतर कदम उठाती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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