एनडीएमसी के उपाध्यक्ष ने मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था का किया जमीनी निरीक्षण

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एनडीएमसी के उपाध्यक्ष ने मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था का किया जमीनी निरीक्षण


एनडीएमसी के उपाध्यक्ष ने मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था का किया जमीनी निरीक्षण


- नालों की सफाई का 80 प्रतिशत काम पूरा, 15 जून से पूर्व दूसरे चरण की 100 प्रतिशत डी-सिल्टिंग का लक्ष्य

नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने आगामी मानसून को देखते हुए एनडीएमसी क्षेत्र में जलभराव की समस्या को न्यूनतम करने के उद्देश्य से शुक्रवार को विभिन्न क्षेत्रों का जमीनी निरीक्षण कर मानसून तैयारियों की समीक्षा की।

निरीक्षण अफ्रीका एवेन्यू से प्रारम्भ होकर आर.के. आश्रम मार्ग तक किया गया, जिसमें जलभराव संभावित क्षेत्रों तथा महत्वपूर्ण स्थलों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान कुलजीत सिंह चहल ने नालों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था, सड़कों की स्थिति, डी-वाटरिंग पंपों की उपलब्धता तथा अन्य मानसून संबंधी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने तथा मानसून के दौरान सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए।

चहल ने कहा कि एनडीएमसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ, स्मार्ट एवं तकनीक-आधारित शहरी प्रशासन के विजन के अनुरूप व्यापक मानसून कार्ययोजना तैयार की। इस योजना में मानसून पूर्व तैयारी, वर्षा के दौरान त्वरित कार्रवाई तथा मानसून के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत शामिल है।

उपाध्यक्ष ने बताया कि जलभराव से निपटने के लिए एनडीएमसी ने डी-वाटरिंग पंप, डीजी सेट, आवश्यक मानवबल तथा नियंत्रण कक्षों की व्यवस्था की है। चहल ने बताया कि वर्तमान में एनडीएमसी क्षेत्र में केवल दो प्रमुख जलभराव संभावित बिंदु साउथ एवेन्यू और जनपथ शेष हैं। इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे तथा सेंसर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं ताकि वर्षा के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनडीएमसी की टीम मानसून शुरू होने से पूर्व इन दोनों स्थानों पर भी प्रभावी समाधान सुनिश्चित कर क्षेत्र को ‘शून्य जलभराव संवेदनशील बिंदु क्षेत्र’ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि नालों की गाद निकालने का प्रथम चरण 31 मार्च तक पूरा कर लिया गया है। प्रथम चरण के अंतर्गत कुल 7,888 बेल माउथ, 4,833 गली ट्रैप तथा 8,913 मैनहोल की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

उन्होंने बताया कि डी-सिल्टिंग का दूसरा चरण वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है तथा इसे 15 जून से पूर्व 100 प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत नालों, स्टॉर्म वाटर ड्रेनों, बेल माउथ एवं गली ट्रैप्स की व्यापक सफाई का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

चहल ने बताया कि जलभराव वाले क्षेत्रों की बेहतर निगरानी एवं प्रबंधन के लिए एनडीएमसी ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क की जीआईएस मैपिंग प्रारम्भ की है। इसके अंतर्गत बेल माउथ, गली ट्रैप, कनेक्टिंग पाइप, मैनहोल एवं ब्रिक बैरल ड्रेनों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि सड़कों, गड्ढों, मैनहोल कवर, ट्रेंच तथा ड्रेनेज नेटवर्क की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। साथ ही सड़कों, वर्षा जल संचयन संरचनाओं एवं विद्युत प्रणालियों का भी निरीक्षण किया जा रहा है ताकि मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान एनडीएमसी नालों एवं संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी करेगी तथा डी-वाटरिंग पंपों एवं डीजी सेटों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करेगी। साथ ही पीडब्ल्यूडी, दिल्ली जल बोर्ड, रेलवे, भारतीय मौसम विभाग, अग्निशमन सेवा तथा दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय बनाए रखा जाएगा। आगामी मानसून के लिए डी-वाटरिंग पंपों, सम्प्स एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है। साथ ही त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मानवबल एवं उपकरणों की तैनाती की कार्ययोजना भी तैयार की गई है।

कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि एनडीएमसी नागरिकों एवं आगंतुकों को सुरक्षित, स्वच्छ और जलभराव-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीक, बेहतर योजना एवं प्रभावी समन्वय के माध्यम से मानसून के दौरान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए एनडीएमसी पूरी तरह तैयार है।

चहल ने कहा कि एनडीएमसी की पूरी टीम दिन-रात कार्य कर रही है ताकि मानसून के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। एनडीएमसी का लक्ष्य जलभराव की समस्या का समाधान करना ही नहीं बल्कि क्षेत्र को पूर्णतः सुरक्षित, स्वच्छ और जलभराव-मुक्त बनाना है।

इस अवसर पर सिविल इंजीनियरिंग विभाग (सड़क, ड्रेनेज, सीवरेज एवं भवन अनुरक्षण), जन स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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