अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर साहित्य अकादेमी में बहुभाषी कवि सम्मेलन, 23 भाषाओं के कवियों ने किया पाठ
नई दिल्ली, 21 फरवरी (हि.स.)। साहित्य अकादेमी के बहुभाषी कवि सम्मेलन में शनिवार को 23 भारतीय भाषाओं के कवियों ने अपनी मातृभाषा में कविता पाठ कर मातृ भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी कवि दिविक रमेश ने की। इस दौरान दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि भी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर यहां साहित्य अकादेमी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संताली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू के कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में दिविक रमेश ने कहा कि मातृ भाषाएं सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करती हैं। उनका संरक्षण जरूरी है। मातृभाषा दिल की भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम होती है। उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए। अनुवाद के माध्यम से भाषाओं को और मजबूत बनाया जा सकता है। अंत में उन्होंने अपनी कविता बहुत कुछ है अभी सुनाई।
कवियों ने अपनी रचनाओं में बचपन, प्रकृति, माता-पिता और समाज से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया। कई कवियों ने सस्वर कविता पाठ किया। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुति की सराहना की।
इस मौके पर हाल ही में दिवंगत बोडो भाषा के संयोजक तारेन चौ. बर, बांग्ला के साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता शंकर और हिंदी के बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित देवेंद्र कुमार को श्रद्धांजलि दी गई। उनके सम्मान में एक मिनट का मौन रखा गया।
कविता पाठ करने वालों में रत्नोत्तमा दास, कौशिक सेन, किरण बर, काजल सूरी, अम्लान ज्योति गोस्वामी, भाग्येंद्र पटेल, रमेश अरोली, रविंदर कौल रवि, लीलेश कुडाळकार, निवेदिता झा, सिंधु सुरेश, मिसना चानू, जीवन प्रकाश तलेगांवकर, हर्क बहादुर लामगादे, बिरजा महापात्र, अर्कमल कौर, प्रमोद कुमार शर्मा, सरोजिनी बेसरा, मोहिनी हिंगोराणी, विनीता एसआर, दत्तैया अत्तेम और मोईन शादाब शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन उपसचिव प्रशासन एन सुरेश बाबु ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

