एमसीडी कार्यशाला: ठोस अपशिष्ट नियम 2026 पर जोर, स्रोत पर चार श्रेणियों में हो कचरा पृथक्करण

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एमसीडी कार्यशाला: ठोस अपशिष्ट नियम 2026 पर जोर, स्रोत पर चार श्रेणियों में हो कचरा पृथक्करण


एमसीडी कार्यशाला: ठोस अपशिष्ट नियम 2026 पर जोर, स्रोत पर चार श्रेणियों में हो कचरा पृथक्करण


नई दिल्ली, 18 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-जागरूकता को लेकर मंगलवार को विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को नए नियमों की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी गई तथा नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कार्यशाला में उप महापौर डॉ. मोनिका पंत, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन जय भगवान यादव, स्थायी समिति उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, डेम्स समिति अध्यक्ष संदीप कपूर, अपर आयुक्त अरुण कुमार मिश्रा सहित विभिन्न जोन के चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, समिति सदस्यों और पार्षदों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर आधारित विशेष बुकलेट का विमोचन भी किया गया। इसमें नए नियमों, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन से जुड़ी जानकारियां सरल भाषा में दी गई हैं।

उप महापौर डॉ. मोनिका पंत ने कहा कि निगम कचरे को स्रोत पर ही अलग करने को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि घरों, बाजारों और संस्थानों में कचरे का पृथक्करण होने से उसके संग्रहण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।

स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि अब नागरिकों को कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक करने की आदत अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि स्रोत पर सही पृथक्करण ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने ‘दिल्ली को कूड़े से आजादी’ अभियान को नए नियमों के प्रति जन-जागरूकता से जोड़ने की बात कही।

नेता सदन जय भगवान यादव ने नागरिकों से कचरे से खाद बनाने, पुन: उपयोग और सर्कुलर मॉडल को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कचरे को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में काम करने की जरूरत है।

डेम्स समिति अध्यक्ष संदीप कपूर ने कहा कि नए नियमों में कचरे के चार भागों में पृथक्करण, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने तथा लैंडफिल पर दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि नियमों का एक प्रमुख उद्देश्य सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देना है, जिसमें कचरे को अधिकतम स्तर तक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है।

कार्यशाला में कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण एवं प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों, पुनर्चक्रण, कचरे से खाद बनाने और लैंडफिल पर निर्भरता कम करने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

एमसीडी ने नागरिकों से अपील की कि वे घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही निर्धारित श्रेणियों में अलग करें। साथ ही गीले कचरे से खाद बनाने तथा सूखे और अन्य कचरे के उचित निस्तारण एवं पुनर्चक्रण में सहयोग करें।

निगम का कहना है कि स्वच्छ दिल्ली का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी जरूरी है। निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू कर दिल्ली को स्वच्छ और सुंदर बनाने का लक्ष्य रखा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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