दिल्ली को बिन-मुक्त बनाने की तैयारी, तीन जोन में तीन माह के भीतर शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

WhatsApp Channel Join Now
दिल्ली को बिन-मुक्त बनाने की तैयारी, तीन जोन में तीन माह के भीतर शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट


नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एमसीडी ने अब पारंपरिक सामुदायिक कूड़ेदानों पर निर्भरता कम कर शहर को बड़े पैमाने पर बिन-मुक्त बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। निगमायुक्त संजीव खिरवार ने बुधवार को स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को वार्डवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, जोनवार स्वच्छता योजनाओं, कूड़ा संवेदनशील बिंदुओं (जीवीपी), द्वितीयक संग्रहण केंद्रों के आसपास सफाई, कचरा संग्रहण एवं परिवहन तथा विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

निगमायुक्त ने सभी जोनल उपायुक्तों को प्रत्येक वार्ड में मौजूदा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था का आकलन कर वार्डवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके तहत करीब 5 से 6 किलोमीटर के दायरे में ऐसी उपयुक्त भूमि और सुविधाओं की पहचान की जाएगी, जहां गीले एवं जैव अपघटनीय कचरे के विकेंद्रीकृत उपचार के लिए सीबीजी, बायोगैस, कंपोस्टिंग और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सके।

आरडब्ल्यूए और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के साथ-साथ अधिकृत-अनधिकृत कॉलोनियों, संकरी एवं भीड़भाड़ वाली गलियों, जेजे क्लस्टर, अस्पतालों, बाजारों, वाणिज्यिक और संस्थागत क्षेत्रों की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग कचरा संग्रहण मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऐसे इलाकों में जहां बड़े पारंपरिक कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंच सकते, एमसीडी उपयुक्त मार्गों की पहचान कर छोटे या विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों को तैनात करेगी। इसका उद्देश्य घर-घर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाना और सड़क किनारे कचरा जमा होने अथवा द्वितीयक डंपिंग को रोकना है।

सामुदायिक कूड़ेदानों पर निर्भरता को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने की योजना है। निगमायुक्त ने इसे मौजूदा स्तर के अधिकतम 20 प्रतिशत तक लाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इसके लिए तीन जोन में तीन माह के भीतर पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। बाजारों को भी निर्धारित संग्रहण व्यवस्था और समर्पित परिवहन प्रोटोकॉल के जरिए चरणबद्ध तरीके से बिन-मुक्त किया जाएगा।

अधिक आवाजाही वाले और वाणिज्यिक क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था शुरू या मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही जरूरत वाले स्थानों पर मशीनीकृत गीली सफाई की व्यवस्था भी की जाएगी।

एमसीडी की 823 जीरो वेस्ट कॉलोनियों के मॉडल को दिल्ली के अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में लागू करने पर भी जोर दिया गया। लक्षित जीरो वेस्ट कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए और अन्य एसोसिएशनों को श्रेडिंग मशीन उपलब्ध कराने की लागत और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

निगमायुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि एमसीडी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले स्वच्छता ही सेवा अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेगा। इस वर्ष अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है।

अभियान के तहत स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और कठिन एवं गंदे स्थानों का कायाकल्प, स्वच्छ सार्वजनिक स्थान, “स्वच्छ पाठशाला–युवा फॉर स्वच्छता”, नागरिक जागरूकता और जनभागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूली विद्यार्थियों और युवाओं को भी विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

स्वच्छता अभियान के दौरान सफाई मित्रों के कल्याण और सम्मान से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 तथा चार-तरफा स्रोत पृथक्करण और कंपोस्टिंग को लेकर घर-घर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

पौधारोपण अभियान, पर्यावरण-अनुकूल आयोजन, विश्व पर्यटन दिवस और स्वच्छ भारत दिवस पर विशेष कार्यक्रम भी होंगे। वहीं “कबाड़ से जुगाड़–वेस्ट टू वेल्थ”, “कबाड़ से कला–वेस्ट टू आर्ट”, दान अभियान, आरआरआर गतिविधियों और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मेलों के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की योजना है।

निगमायुक्त ने सभी जोनल उपायुक्तों और विभागाध्यक्षों को अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ दिल्ली में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी पहलों का समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

Share this story