वायु एवं धूल प्रदूषण रोकने के लिए एमसीडी ने तेज किए उपाय

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वायु एवं धूल प्रदूषण रोकने के लिए एमसीडी ने तेज किए उपाय


वायु एवं धूल प्रदूषण रोकने के लिए एमसीडी ने तेज किए उपाय


- सड़कों की री-सर्फेसिंग, मैकेनिकल स्वीपिंग, वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन पर जोर

नई दिल्ली, 06 अक्टूबर (हि.स.)।

दिल्ली में आगामी सर्दियों के दौरान वायु एवं धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने व्यापक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। निगम का मुख्य फोकस सड़कों की बेहतर स्थिति, धूल नियंत्रण, मशीनीकृत सफाई, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों की निगरानी और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर है। यह जानकारी मंगलवार को एमसीडी स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने दी।

उन्होंने बताया कि एमसीडी के अधिकार क्षेत्र में करीब 6,127 किलोमीटर सड़कों पर लगभग 57,000 सफाई मित्रों द्वारा नियमित मैनुअल स्वीपिंग की जा रही है। वर्ष 2026 में 1,202 किलोमीटर सड़कों की एंड-टू-एंड री-सर्फेसिंग और स्ट्रेंथनिंग का कार्य लिया गया है। इसके अलावा अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 6,797 गड्ढों की मरम्मत की गई है।

18 मई 2026 से एमसीडी क्षेत्रों में डीप क्लीन ड्राइव के तहत सड़कों पर लंबे समय से जमा धूल और सिल्ट हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। अब तक करीब 2,900 मीट्रिक टन सिल्ट हटाई जा चुकी है और लगभग 1,200 किलोमीटर सड़क की सफाई की गई है।

एमसीडी की 66 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के माध्यम से प्रमुख सड़कों की मशीनीकृत सफाई की जा रही है। इन मशीनों से प्रतिदिन करीब 180 टन धूल एकत्र की जा रही है। इसके अतिरिक्त 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की चरणबद्ध तैनाती प्रस्तावित है, जबकि 40 अतिरिक्त मशीनों को किराये पर लेने के लिए टेंडर जारी किया गया है। इसके साथ ही 1,000 लिटर पिकर मशीनों की भी चरणबद्ध तैनाती की जाएगी।

सत्या शर्मा ने बताया कि धूल नियंत्रण के लिए एमसीडी ने विभिन्न सड़कों पर 167 वाटर स्प्रिंकलर और 28 मोबाइल एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। इनका इस्तेमाल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के विभिन्न चरणों के अनुसार किया जाता है।

इसके अलावा एमसीडी की सी एंड डी सुविधाओं, डंपसाइट और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों पर 20 एंटी-स्मॉग गन तथा एमसीडी की हाई-राइज इमारतों पर 15 एंटी-स्मॉग गन स्थापित हैं। हाल ही में 12 नई वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन भी खरीदी गई हैं, जिन्हें जल्द तैनात किया जाएगा।

विंटर एक्शन प्लान के तहत एमसीडी ने संयुक्त प्रवर्तन टीमों का गठन किया है। ये टीमें बायोमास जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण, अनधिकृत ईंधन के इस्तेमाल, अवैध सी एंड डी वेस्ट तथा कूड़ा डंपिंग और सी एंड डी वेस्ट स्टोरेज एवं डंप साइटों की निगरानी करेंगी।

डीपीसीसी द्वारा चिन्हित 46 हॉटस्पॉट पर वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय से कार्रवाई की जा रही है। जोन के उपायुक्तों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 11 राजस्व जिलों में गठित निगरानी समितियों और क्रॉस-फंक्शनल टीमों के माध्यम से हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी और निरीक्षण किया जा रहा है।

एमसीडी ने हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच निगम के अधिकार क्षेत्र में 4,00,282 पौधे लगाए गए हैं। इनमें 1,26,866 पेड़, 2,69,882 झाड़ियां और 3,534 बांस शामिल हैं। इसके अलावा वर्ष 2026 के लिए चिन्हित 8,68,958 वर्गमीटर ब्राउन पैच का लक्ष्य भी पूरा किया जा चुका है।

स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल आपातकालीन उपाय पर्याप्त नहीं हैं। सड़क रख-रखाव, धूल की रोकथाम, नियमित सफाई, हरित क्षेत्र का विस्तार और प्रदूषण के स्रोतों की निरंतर निगरानी को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी उपायों की नियमित समीक्षा करते हुए समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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