साहित्यकारों ने शब्दों से वीरों के शौर्य को किया नमन, कारगिल विजय दिवस पर साहित्यिक संध्या आयोजित
नई दिल्ली, 26 जुलाई (हि.स.)। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के पश्चिमी एवं नैऋत्य केंद्र की ओर से रविवार को द्वारका स्थित दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज में साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कविता, कहानी और पुस्तक-सार प्रस्तुतियों के माध्यम से कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वीर सैनिकों के परिवारों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ में संयोजक प्रो. पूनम राठी ने स्वागत भाषण में कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सैनिक जहां देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, वहीं साहित्यकार समाज में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन करते हैं।
मुख्य वक्ता द्वारका उत्तरी नगर संघचालक प्रदीप देसवाल ने युवाओं से राष्ट्रहित, सेवा और त्याग को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान किया। साहित्यकार वंदना यादव ने वीर सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति समाज की संवेदनशीलता को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि सैनिक और साहित्यकार दोनों ही राष्ट्रनिर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। एक देश की सीमाओं की रक्षा करता है तो दूसरा संस्कृति, भाषा और साहित्य की रक्षा का दायित्व निभाता है।
साहित्यिक सत्र में कारगिल युद्ध पर आधारित पुस्तकों का सार प्रस्तुत किया गया तथा वीर सैनिकों के जीवन पर आधारित कहानियों का वाचन किया गया। अंशिका ने 'कारगिल : एक यात्री की जुबानी', प्रवीण ने रचना बिष्ट रावत की 'कारगिल', नैंसी शर्मा ने 'टाइगर हिल का हीरो', दीक्षा गहलोत ने 'कारगिल गर्ल' तथा शिवरत कुमारी ने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे के जीवन पर आधारित कहानी प्रस्तुत की।
काव्य पाठ में समायरा राय, आदित्य भट्ट, के.के. शर्मा, डॉ. मंजू शुक्ला, गुंजन बिष्ट, पवन कुमार, एम.एस. सान्या राव, शोभा शर्मा, सरिता, रिया भारद्वाज और संगीता पीयूष सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शहीदों के शौर्य, त्याग और राष्ट्रप्रेम को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से ओतप्रोत वातावरण बना रहा।
आयोजन में विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। विद्यार्थियों ने साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रनायकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया।
इस अवसर पर आमंत्रित वीर सैनिकों की पत्नियों को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया तथा प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

