उच्चतर शिक्षण संस्थानों के लिए जरूरी हैं प्रतिभा, उत्पत्ति और नवोन्वेष शब्द: योगेश सिंह

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उच्चतर शिक्षण संस्थानों के लिए जरूरी हैं प्रतिभा, उत्पत्ति और नवोन्वेष शब्द: योगेश सिंह


उच्चतर शिक्षण संस्थानों के लिए जरूरी हैं प्रतिभा, उत्पत्ति और नवोन्वेष शब्द: योगेश सिंह


नई दिल्ली, 11 मई (हि.स.)। इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती एवं दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रौद्योगिकी संकाय ने सोमवार को विश्वविद्यालय के वाइसरीगल लॉज स्थित कन्वेंशन हॉल में ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ समारोह का आयोजन किया। इस समारोह की अध्यक्षता डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की।

इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने वीडियो संदेश में इस आयोजन के लिए इंद्रप्रस्थ विज्ञान भारती एवं दिल्ली विश्वविद्यालय को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ ब्रोशर भी जारी किया गया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि हमने 800 वर्षों की गुलामी, शर्मिंदगी, अपमान और अधीनता को सहा है। इसका मुख्य कारण यह था कि हमारे पूर्वज प्रौद्योगिकी की प्रगति के साथ कदमताल नहीं कर पाए। उस 800 साल की दासता को भूलना नहीं चाहिए। तभी इस देश की विकास को सही दिशा में ले जा सकते हैं।

कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमें प्रेरणा देता है कि हमें प्रौद्योगिकी के मामले में समझौता नहीं करना है। यदि हम तकनीक और प्रौद्योगिकी विकसित कर सकते हैं तो विकसित करें, यदि किसी कारण से हम प्रौद्योगिकी विकसित नहीं कर सकते तो उसे खरीदें और यदि खरीद नहीं सकते तो दूसरों के साथ प्रौद्योगिकी पर सहभागिता करें, यह हमारे देश के लिए बहुत जरूरी है।

कुलपति ने कहा कि प्रतिभा, उत्पत्ति और नवोन्वेष ये तीन शब्द हमारे सभी उच्चतर शिक्षण संस्थानों के लिए बहुत जरूरी हैं। यह अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ाएंगे। जब हम पाठ्यचर्या डिजाइन करें तो इन 4-5 शब्दों को ध्यान में रखें। विश्वविद्यालयों को इन शब्दों पर ध्यान रखना जरूरी है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबर्धन दास ने कहा कि जॉन डाल्टन से लगभग 2500 साल पहले हमारे ऋषि महर्षि कणाद ने परमाणु के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।

डॉ. दास ने कहा कि हमारे एक हजार वर्ष के गुलामी के काल में वैज्ञानिक प्रगति में गिरावट आई। पहले ज्ञान का भंडार इतना अधिक था, जिसे आतताइयों द्वारा नष्ट कर दिया गया। नालंदा की लाइब्रेरी जलाने में भी उन्हें 9 महीने से ऊपर समय लगा।

उन्होंने कहा कि आज भारत फिर से प्रगति कर रहा है। कोविड-19 महामारी में हमारे वैज्ञानिकों ने दुनिया को दिखा दिया कि हम इतनी वैक्सीन बना सकते हैं कि भारत के साथ दूसरे देशों को भी सप्लाई कर सकें। आज दुनिया में सबसे ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन भारत में होती है। विश्व का 25 प्रतिशत थोरियम भारत में है। वैज्ञानिक उस पर काम कर रहे हैं। आने वाले 10 वर्षों में भारत ऊर्जा में आत्मनिर्भर बन जाएगा।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव विवेकानन्द पाई ने कहा कि जब तक भारतीय भाषाओं में विज्ञान आगे नहीं आएगा, तो यह 140 करोड़ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान भारती इसमें प्रयास कर रही है।

इस अवसर पर दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. पायल मागो, रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता, एफओटी के डीन प्रो. संजीव सिंह सहित अनेकों डीन, डायरेक्टर, अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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